संपादकीय

हीथ्रो से जुड़े सवाल

दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे में से एक लंदन का हीथ्रो शुक्रवार को बिजली कटने की वजह से बंद रहा, जिससे भारत समेत कई जगहों की उड़ानों पर असर पड़ा। यह वाकया हैरान करने वाला है क्योंकि अक्सर ऐसी समस्याओं को गरीब और विकासशील मुल्कों से जोड़कर देखा जाता रहा है।

कई घंटे लगे : पिछले साल हीथ्रो से रोज औसतन 2.20 लाख से अधिक यात्रियों ने सफर किया। यहां से दुनिया की 230 जगहों की उड़ानें भरी जाती हैं। बताया गया कि हवाई अड्डे की बिजली पास में आग लगने की वजह से गई। जिस सब-स्टेशन से हवाई अड्डे को बिजली की सप्लाई की जाती थी, वहां आग लगी और इससे यह समस्या खड़ी हुई। सब-स्टेशन पर लगी आग पर काबू पाने में कई घंटे लग गए।

आतंक का एंगल : ब्रिटिश सरकार ने बताया कि आग लगने की घटना में किसी का हाथ होने की आशंका नहीं है। इसके बावजूद आतंकवाद निरोधी दस्ता इस मामले की तहकीकात कर रहा है। वजह यह है कि ब्रिटेन के अहम इन्फ्रास्ट्रक्चर पर इस घटना का असर हुआ। इस वाकये का असर हवाई अड्डे के आसपास के रिहायशी इलाकों और बिजनेस एस्टेब्लिशमेंट पर भी पड़ा।

यात्री परेशान : हीथ्रो के बंद होने से कम से कम 1,351 उड़ानों पर असर पड़ा। इनमें से कुछ को लंदन के गैटविक हवाई अड्डे, पैरिस और एम्सटर्डम की ओर भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ा। खबरों के मुताबिक, हवाई अड्डे के बंद होने से करीब 3 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं। और आने वाले दिनों में भी इससे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित होंगे।

एयरलाइंस क्या सक्षम हैं : जितने बड़े पैमाने पर हीथ्रो के बंद होने और उस वजह से उड़ानों के रद्द या रीशेड्यूल होने से लोगों पर असर पड़ा है, यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यात्रियों की परेशानी दूर करने में एयरलाइंस सक्षम हैं? फिर सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि जिस तरह की चीजों को लेकर गरीब और विकासशील देशों को पश्चिम में नीची नजर से देखा जाता है, हीथ्रो में हुए हादसे के बाद उस पर ये देश क्या कहेंगे।

बैकअप नहीं : दूसरा सवाल यह है कि क्या ऐसे किसी हादसे की आशंका हीथ्रो के मैनेजमेंट को नहीं थी और अगर उन्हें ऐसा कोई अंदेशा था तो इसके लिए उपाय क्यों नहीं किए गए थे? एक और बात यह भी है कि हालिया दशक में भारत जैसे देशों में बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलप हो रहा है, जो वैश्विक स्तर का है। चीन तो इस मामले में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देशों में शामिल है। वहीं, पश्चिमी देशों में इन्फ्रास्ट्रक्चर इनके मुकाबले कमतर साबित हो रहा है।

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