डिजिटल लत और नशे की चुनौतियां-समाधान

आज हम देखते हैं कि कई अभिनेता और खिलाड़ी शराब और गुटखे के विज्ञापन करते हैं, जो युवाओं को गलत संदेश देते हैं। इसके अलावा, ड्रीम इलेवन और ऑनलाइन गेमिंग को भी इन लोगों के द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो युवाओं को रातोंरात करोड़पति बनने का सपना दिखाते हैं। यदि हमें युवाओं में मानवीय मूल्यों को बचाना है, तो पहले स्वयं को बदलना होगा। तभी हम दूसरों को बदलने का प्रयास कर सकते हैं। समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए हमें अपने आचरण और विचारों में सुधार करना होगा…
समाज में अन्याय के विरुद्ध लडऩे वाले लोग समाज के स्तंभ होते हैं। ये लोग समाज की सांस्कृतिक, धार्मिक और पारंपरिक दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक सुसंस्कृत समाज की कल्पना उसके सदस्यों के आचरण और मूल्यों पर निर्भर करती है। समाज में सुख-शांति और एकता बनाए रखने के लिए सहयोग और एकजुटता आवश्यक है। यही वह धागा है जो मानव समाज को बांधे रखता है और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देता है। मनुष्य के स्वभाव में दया, करुणा, प्रेम, सहनशीलता, कृतज्ञता और मानवीय हास्य-मजाक जैसे गुण होने चाहिएं। ये गुण ही मानव जीवन को सार्थक बनाते हैं। मित्रता, विनम्रता, शिष्टाचार और दूसरों की परेशानियों के प्रति चिंता जैसे गुण सकारात्मकता और अपनेपन का संदेश देते हैं। ये अच्छाइयां ही समाज को रहने योग्य एक सुंदर स्थान बनाती हैं। लेकिन आज के समय में, विशेषकर युवाओं में, इन मानवीय गुणों का ह्रास होता जा रहा है। आज का युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में आता जा रहा है। चाहे वह ड्रग्स का नशा हो या मोबाइल फोन और सोशल मीडिया की लत, यह समाज के लिए एक गंभीर समस्या बन गई है।
हम सभी इस समस्या से चिंतित तो हैं, लेकिन इसका समाधान ढूंढने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहे हैं। अधिक धन कमाने के लालच में कुछ लोग युवाओं को नशे के जाल में फंसा रहे हैं, जो न केवल उनके भविष्य के लिए खतरनाक है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर चुनौती भी है। नशीली दवाओं की समस्या बहुआयामी है। यह केवल कानून और स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को प्रभावित करती है। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए केवल सरकार या पुलिस प्रशासन पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसे रोकने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है, जिसमें पुलिस, समाज, परिवार और शिक्षण संस्थानों की समान भागीदारी हो। यदि सामाजिक स्तर पर सहयोग, अनुशासन और सही मार्गदर्शन दिया जाए, तो नशे की प्रवृत्ति को खत्म किया जा सकता है। खेलकूद और प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है, जिससे उन्हें नशे से दूर रहने की प्रेरणा मिलेगी। साथ ही, सरकार को युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए, क्योंकि बेरोजगारी भी नशे की ओर प्रेरित करने वाला एक प्रमुख कारक है। दूसरी गंभीर समस्या मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का नशा है। आज का युवा वर्ग इस लत से बुरी तरह प्रभावित है। मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों तरह के खतरे पैदा हो रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधी खतरों में आंखों पर दबाव बढऩा, एकाग्रता में कमी, तनाव और चिंता बढऩा, मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव और अकेलेपन की भावना शामिल हैं। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी मोबाइल फोन के माध्यम से हैकिंग, निजी जानकारियों का लीक होना और अन्य साइबर अपराधों का खतरा बढ़ गया है। बच्चों के मस्तिष्क पर मोबाइल फोन का अधिक उपयोग और भी हानिकारक प्रभाव डालता है।
इसलिए, मोबाइल फोन के सावधानीपूर्वक उपयोग और निगरानी की आवश्यकता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को डिजिटल साक्षरता के बारे में शिक्षित करें और उनके स्क्रीन टाइम को सीमित करें। अभी हाल में ही ऑस्ट्रेलिया और चीन ने बच्चों की स्क्रीन टाइम को सीमित करने के संबध में कानून बनाए हैं! भारत सरकार को भी इस दिशा में काम करना चाहिए! युवा वर्ग में मोबाइल की लत इतनी अधिक बढ़ गई है कि वे अपनी पढ़ाई-लिखाई को छोडक़र घंटों सोशल मीडिया पर रील्स देखने और बनाने में व्यस्त रहते हैं। यह न केवल उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाल रहा है। हाल ही में एक समाचारपत्र में पढ़ा कि एक छात्रा ने मोबाइल फोन के उपयोग से रोके जाने के कारण आत्महत्या कर ली। यह घटना हमें समाज के एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम अपने युवाओं को सही दिशा दे पा रहे हैं? यह समय है कि हम इस गंभीर समस्या पर गंभीरता से विचार करें और युवाओं को डिजिटल दुनिया के सही और गलत के बीच अंतर समझाने का प्रयास करें।
हमारे समाज में बुराइयां बढ़ती जा रही हैं, लेकिन सतर्कता, जागरूकता, अनुशासन, संयम और अच्छी संगत ही हमें इनसे बचा सकती है। समाज में कुछ पेशेवर लोगों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है, जैसे कि अध्यापक, नेता, खिलाड़ी और अभिनेता। यदि ये लोग अपनी आचार संहिता को भूल जाएं, तो समाज पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। आज हम देखते हैं कि कई अभिनेता और खिलाड़ी शराब और गुटखे के विज्ञापन करते हैं, जो युवाओं को गलत संदेश देते हैं। इसके अलावा, ड्रीम इलेवन और ऑनलाइन गेमिंग को भी इन लोगों के द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो युवाओं को रातोंरात करोड़पति बनने का सपना दिखाते हैं। यदि हमें युवाओं में मानवीय मूल्यों को बचाना है, तो पहले स्वयं को बदलना होगा। तभी हम दूसरों को बदलने का प्रयास कर सकते हैं। समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए हमें अपने आचरण और विचारों में सुधार करना होगा। केवल तभी हम एक बेहतर और सुसंस्कृत समाज का निर्माण कर सकते हैं। हिमाचल की बात करें, तो यहां चिट्टे का जाल बहुत तेजी से फैलता जा रहा है। छात्रों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और सरकार-विपक्ष को मिलकर इसे रोकना होगा।
रमेश धवाला



