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श्रीराम के 45 गुण और 10 नाम:शत्रुओं का दमन किया इसलिए नाम पड़ा अरिंदम, केरल में है 1100 साल पुराना राम मंदिर

22 जनवरी को अयोध्या में श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। श्रीराम भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं। ऋग्वेद की शाकल संहिता के दसवें मंडल में भी श्रीराम का जिक्र है। श्रीमद्भागवत महापुराण में श्रीराम को भगवान विष्णु का अंश कहा गया है। वाल्मीकि रामायण में नारद जी ने श्रीराम को सबसे ताकतवर और धैर्यवान बताया है।

शास्त्रों में राम जी के अलग-अलग नाम बताए गए हैं। नारद जी ने वाल्मीकि ऋषि को श्रीराम के 45 गुण बताए थे।

सबसे पहले जानिए श्रीराम के 10 खास नाम

अब जानिए श्रीराम के 45 गुण कौन-कौन से हैं

वाल्मीकि रामायण में बालकांड के शुरुआती 18 श्लोक में श्रीराम के गुण बताए हैं। इसमें महर्षि वाल्मीकि नारद से पूछते हैं कि इस संसार में क्या कोई ऐसा इंसान है जो हमेशा सच बोलने वाला, धर्म को जानने और उस पर चलने वाला, वीर्यवान और हर तरह के गुणों से संपन्न हो। इस पर नारद जी, महर्षि वाल्मीकि को श्रीराम के बारे में बताते हैं। नारद जी कहते हैं कि इक्ष्वाकु वंश में पैदा हुए राम के 45 गुण बताए हैं।

अयोध्या-रामेश्वरम के अलावा श्रीराम के ये 5 मंदिर भी हैं प्राचीन

अयोध्या, चित्रकूट, नासिक, जानकी मंदिर के अलावा भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। भगवान राम अपने जीवन काल में जिन जगहों से गुजरे वहां मंदिर या कोई स्मारक है। ऐसे ही 5 मंदिर जो रामायण और महाभारत काल से जुड़े हैं। जो राम के सबसे पुराने मंदिरों में गिने जाते हैं।

त्रिप्रायर राम मंदिर

कहां है – केरल के त्रिशूर जिले में करुवन्नूर नदी के तट पर स्थित है।

कितना पुराना – करीब 1100 साल

खास बातें – ये मंदिर महाभारत काल का माना जाता है। अभी जो मंदिर का स्ट्रक्चर है वो 11वीं और 12वीं शताब्दी का है। ऐसी मान्यता है कि यहां राम मूर्ति की पूजा भगवान श्रीकृष्ण ने भी की है। इस मंदिर में प्राचीन मूर्तियां और लकड़ी की शानदार कारीगरी दिखाई देती है। इस मंदिर में एकादशी उत्सव खासतौर पर मनाया जाता है। मंदिर की मूर्तियां समुद्र से मिली थीं। इसके बाद इन्हें यहां मंदिर बनाकर स्थापित किया गया था।

कालाराम मंदिर

कहां है – महाराष्ट्र के नासिक में पंचवटी क्षेत्र में

कितना पुराना – 220 साल से ज्यादा

खास बातें – ये मंदिर 1788 के आसपास बनकर तैयार हुआ था। मंदिर में श्रीराम की करीब 2 फीट ऊंची प्रतिमा है। मूर्ति का रंग काला है, इसलिए मंदिर का नाम कालाराम मंदिर पड़ा। रामायण काल में वनवास के समय श्रीराम, लक्ष्मण और सीता नासिक के पंचवटी में गोदावरी नदी के किनारे ठहरे थे। पंचवटी से ही देवी सीता का रावण ने हरण किया था। इस मंदिर को सरदार रंगारू ओधेकर ने बनवाया था। माना जाता है कि सरदार रंगारू को सपने में दिखा था कि राम जी की एक काली मूर्ति गोदावरी नदी में है। अगले दिन मूर्ति की खोज की तो और इसे मंदिर में स्थापित किया गया।

सीता रामचंद्रस्वामी मंदिर

कहां है – तेलंगाना के भद्राचलम क्षेत्र में गोदावरी नदी के किनारे।

कितना पुराना – करीब 340 साल

खास बातें – मान्यता है कि वनवास के समय पंचवटी से सीता हरण के बाद राम, सीता की खोज में निकले तो गोदावरी नदी पार करके यहां आए थे। यहीं कुछ दूरी पर कुटिया बनाकर रह रहे थे। मंदिर में श्रीराम की मूर्ति के हाथ में धनुष-बाण हैं और देवी सीता साथ में खड़ी हैं। सीता जी के हाथ में कमल का फूल है। मध्यकाल में ये मंदिर कंचली गोपन्ना नाम के व्यक्ति ने बनवाया था। मंदिर 1685 के आसपास बना था।

रामटेक मंदिर

कहां है – महाराष्ट्र के नागपुर से करीब 55 किमी दूर स्थित है।

कितना पुराना – लगभग 200 साल

खास बातें – वनवास के समय श्रीराम, लक्ष्मण और सीता नागपुर से करीब 55 किमी दूर इसी क्षेत्र में कुछ महीनों के लिए ठहरे थे, ऐसी मान्यता है। यहीं पास में अगस्त्य मुनि का आश्रम भी था। अगस्त्य मुनि ने श्रीराम को ब्रह्मास्त्र का ज्ञान दिया था। वैसे तो मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है, लेकिन वर्तमान मंदिर 18वीं शताब्दी में मराठा राजा रघुजी भोंसले द्वारा करवाया गया था। रामटेक क्षेत्र में ही प्राचीन जैन मंदिर में है।

रामास्वामी मंदिर

कहां है – तमिलनाडु के कुंभकोणम शहर में कावेरी नदी के किनारे

कितना पुराना – लगभग 500 साल

खास बातें – श्रीराम के सबसे सुंदर मंदिरों में से एक ये है। मंदिर में रामायण काल से जुड़ी घटनाओं की नक्काशी की हुई है। ये एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के साथ भरत-शत्रुघ्न की भी प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर के प्रवेशद्वार पर विशाल दक्षिण भारतीय शैली का गोपुरम बना हुआ है। यहां अलवर सन्नथी, श्रीनिवास सन्नथी, और गोपालन सन्नथी नाम के तीन और मंदिर स्थापित हैं। माना जाता है कि मंदिर का निर्माण 16वीं सदी में हुआ था।

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