छत्तीसगढ़

भूत प्रेत के नाम पर परिवार के दो सदस्यों की कर दी हत्या, जादू टोना को लेकर कानून बनाने की मांग

रायपुर : आज के आधुनिक युग में भी भूत प्रेत, जादू टोना के नाम पर मारपीट और हत्याएं हो रही हैं. हाल ही में बिलासपुर में भी एक ऐसा ही मामला देखने को मिला. जहां परिवार के सदस्यों ने ही अपने ही परिवार के दो सदस्यों की भूत प्रेत के नाम पर हत्या कर दी. ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति में सरकार से अपील की है. साथ ही इसके लिए सख्त कानून बनाए जाने की भी मांग की है.


दूसरे राज्यों की तर्ज पर बने कानून : अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के पदाधिकारी का कहना है कि महाराष्ट्र और गुजरात में जादू टोना और भूत प्रेत के नाम पर प्रताड़ना देने, हत्या जैसे मामलों के लिए कानून बनाया गया. इस तरह का कानून छत्तीसगढ़ में भी बनाया जाना चाहिए. इसके अलावा टोनही कानून में भी संशोधन किए जाने की मांग की गई है. क्योंकि ये साल 2005 का बनाया हुआ कानून है. अब 20 साल हो चुके हैं. अब इसमें भी बदलाव की जरूरत महसूस हो रही है. साथ ही आम लोगों को भी भूत प्रेत जैसे मामलों को रोकने के लिए जागरूक करना होगा.तभी ऐसी घटनाएं रुकेंगी.

भूत-प्रेत जैसी कोई चीज नहीं : अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्रा ने कहा कि बिलासपुर में भूत प्रेत के शक पर कुछ लोगों की हत्या कर दी गई है. ये दुखद और गंभीर घटना है.वास्तव में भूत प्रेत जैसी कोई चीज नहीं होती है.सिर्फ अंधविश्वास है. लोगों को ऐसे अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए. सरकार को इस मामले में जागरूकता अभियान चलाना चाहिए. जितने भी पढ़े-लिखे और मीडिया के लोग हैं उन्हें ऐसे अंधविश्वास को रोकने के लिए सामने आना चाहिए.

भूत प्रेत की बात है सिर्फ कहानी किस्सों में देखने को मिलती है. वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं होता है. क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में बताने वाले नहीं होते हैं. छोटी सी बीमारी को वे भूत-प्रेत से जोड़ देते हैं. छोटी मोटी सामाजिक समस्याओं को भूत प्रेत जैसी बातों को जोड़ देते हैं. इसमें परिवार प्रस्तावना का शिकार हो जाता है या फिर उसकी हत्या कर दी जाती है. ऐसी घटनाएं को रोकना चाहिए ,तभी सामाजिक विकास हो पाएगा- डॉ दिनेश मिश्रा,अध्यक्ष, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति

भूत प्रेत के नाम पर हो रही हत्या को लेकर क्या किस तरह का कानून बनाने की जरूरत है. इस पर डॉ दिनेश मिश्रा ने कहा कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए बड़े कानून की आवश्यकता है. इस तरह का कानून महाराष्ट्र में बन चुका है. वहां काला जादू के नाम से कानून मनाया गया है. गुजरात में भी ऐसे मामलों के लिए कानून बनाया गया है. डॉ दिनेश मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बात की जाए तो यहां सिर्फ टोनही प्रताड़ना को लेकर ही कानून है. काले जादू अंधविश्वास को लेकर कोई कानून नहीं बनाया गया है.

छत्तीसगढ़ में कैसा हो कानून ?: डॉ दिनेश मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी एक ऐसा कानून बनाने की जरूरत है. जिसमें इन सारे बिंदुओं को शामिल किया जाए. इसके अलावा टोनही प्रावधान अधिनियम 2005 का बनाया गया है. वो भी 20 साल पुराना हो चुका है. उसे भी संशोधित करने की जरूरत है. उसमें जो जेल भेजने और दंड का प्रावधान है. वो 2005 के अनुसार है. इसे भी संशोधित किया जाना चाहिए.

छत्तीसगढ़ में हो चुकी है घटना : आपको बता दें कि फरवरी के अंतिम सप्ताह में बिलासपुर में भी कुछ इसी तरह का मामला सामने आया था. जहां मस्तूरी थाना अंतर्गत देवगांव में अंधविश्वास के कारण एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. शराब पीने के बाद युवक तबीयत खराब हो गई थी. परिजनों ने युवक पर भूत प्रेत का साया समझ कर उसकी जमकर पिटाई कर दी. जिससे उसकी मौत हो गई.

इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ.जिसमें परिजन अंधविश्वास के कारण युवक पर अजीबोगरीब टोटके कर रहे थे. इस दौरान युवक तड़प तड़प कर चिल्लाता नजर आ रहा था. लेकिन परिजनो ने भूत भगाने का उपाय समझकर उसे पीट-पीटकर मार डाला. इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पिता समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था. इन पर पुलिस ने टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था.

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