मध्यप्रदेश

इस समुदाय में रौंगटे खड़े कर देने वाली प्रथा, माता-पिता ही जवान बेटियों से करवाते हैं धंधा!

नीमच (मूलचंद खींची) : बेटियों से जुड़ी बहुत सी कुप्रथाएं आज भी दूर-दराज के क्षेत्रों में है जो कि अंदर ही अंदर समाज को खोखला कर रही है। कुछ तो ऐसे ही दब जाती है लेकिन कई बार इनके खिलाफ आवाज उठती है तो ये एक बड़े सवाल की तरह हमारे सामने आकर खड़ी हो जाती है। मध्य प्रदेश के नीमच में एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां बांछडा समुदाय की पंचायत ने तुलगकी फरमान सुनाते हुए तीन महिलाओं को समाज से बहिष्कृत कर दिया। उनका इतना सा कसूर था कि पिता से उन्होंने संपत्ति का हिस्सा मांग लिया। यह वही महिलाएं है, जिन्हें माता-पिता ने नाबालिग अवस्था में ही देह व्यापार (सेक्स वर्कर) में धकेल दिया था। न तो इनकी शादी की और न ही अलग से रहने के लिए घर दिया। अब उम्र 50 वर्ष के पार हो चुकी है तो इन्हें किसी काम का न समझकर घर से बेदखल कर दिया। इसके लिए बकायदा बांछडा समुदाय की पंचायत बुलाई गई और अगरबत्ती लगाकर मुर्गा काट कर समाज से बहिष्कार कर दिया। पीड़ित तीनों महिलाओं ने मंगलवार को कलेक्टर हिमांशु चंद्रा को शिकायत दर्ज करवाई है।

समाज की कुप्रथा के खिलाफ उठाई आवाज

मनासा तहसील के गांव हाडी पिपलिया निवासी मांगीबाई बांछडा, सपना बांछडा तथा रामकन्या बांछडा ने समाज की कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाई है। तीनों महिलाएं की उम्र 50 से 55 के बीच है, इन्हें महज 12 से 13 वर्ष की आयु में ही परिजनों ने देह व्यापार में धकेल दिया था, देह व्यापार में जब तक पैसा मिलता रहा, माता-पिता और भाई इन्हें अच्छे से रखते थे, लेकिन कुछ साल से उम्र के लिहाज से देह व्यापार करना बंद कर दिया है, ऐसी स्थिति में परिजनों का व्यवहार भी बदल गया। जब इन्होंने माता-पिता से घर बनाने के लिए जमीन मांगी व पिता की संपत्ति में हिस्सा मांगा तो इन्हें समाज से बाहर निकाल दिया।

बता दें कि नीमच जिले में 10 से अधिक ऐसे गांव है, जहां पर देह व्यापार जैसी कुप्रथा खुलेआम चलती है। मामला संज्ञान में आने के बाद कलेक्टर हिमांशु चंद्रा का कहना है कि बांछडा समुदाय को जागरूक करने के लिए अभियान चला रहे हैं। इस मामले में जांच कार्रवाई की जाएगी।

न पुलिस और न ही कोर्ट का आदेश…यहां सिर्फ पंचायत की हुकूमत चलती है

बांछडा समुदाय में देह व्यापार जैसी कुप्रथा आज भी चल रही है। वहीं इससे बडी कुप्रथा यह है कि समाज से बाहर निकाल देना। न तो पुलिस का आदेश मानते है और न ही कोर्ट की कार्रवाई। सिर्फ पंचायत का आदेश ही मान्य होता है। तीनों महिलाओं ने पिता की संपत्ति का हिस्सा मांगा तो उन्हें समाज से बहिष्कार कर दिया। पंचायत में साफ तौर पर कहा गया कि न तो कोई इनसे बातचीत करेगा और न ही शादी अन्य कार्यक्रम में बुलाएगा।

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