छत्तीसगढ़

जीवनदायिनी इंद्रावती नदी पर मंडराया जल संकट, किसानों ने 7 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा, दी आंदोलन की चेतावनी

बस्तर : बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी का जलस्तर लगातार कम होते जा रहा है. फरवरी महीने से ही इंद्रावती नदी में जल संकट मंडराने लगा है, जिसका असर देश में मिनी नियाग्रा के नाम से मशहूर चित्रकोट जलप्रपात पर भी दिखाई दे रहा है. चित्रकोट वाटरफॉल की धारा धीरे-धीरे कम होती जा रही है. वहीं, खेती करने वाले किसानों की चिंता भी बढ़ गई है.

किसानों ने बस्तर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन : इंद्रावती नदी का जलस्तर कम होने को लेकर प्रशासन गंभीर नजर नहीं आ रहा है, जिसके चलते बस्तर वासियों के लिए पेयजल संकट मंडराने लगा है. सूखती इंद्रावती नदी को लेकर बस्तर के किसानों को भी चिंता सताने लगी है. इसलिए शुक्रवार को जिले भर के अलग-अलग पंचायत से सैकड़ों किसानों ने जगदलपुर कलेक्ट्रेट पहुंच कर बस्तर कलेक्टर से 7 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा है और जल्द से जल्द इसके निराकरण की मांग की है.

किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी : किसानों का कहना है कि इंद्रावती नदी में जल संकट स्तर से किसानों को काफी समस्या हो रही है. जल संकट की समस्या से निजात दिलाने की मांग किसानों ने बस्तर कलेक्टर और राज्य सरकार से की है. किसानों का कहना है कि अगर उनकी 7 सूत्रीय मांगे पूरी नहीं होती है तो मजबूरन किसानों को आंदोलन करना पड़ेगा.

हमारी मांगों में मुख्य रूप से जोरानाला एनीकट को तत्काल खोलना है. इसके साथ ही ओडिशा के खातीगुड़ा डेम, तेलांगीरी परियोजना और भस्केल बैराज से इंद्रावती नदी में पानी छोड़ने की मांग शामिल है. इसके अलावा इंद्रावती नदी के सभी एनिकट प्रभारियों को तत्काल रूप से हटाने और नए नियुक्ति करने, सूखे फसलों का सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा देने की मांग भी रखी गई है : पूरन कश्यप, किसान

पर्यटन के लिए पानी छोड़ने को ठहराया गलत : किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रियों व आला अफसरों और पर्यटकों को चित्रकोट वॉटरफाल दिखाने के चलते एनिकट का पानी नहीं छोड़ने की मांग रखी है. इसके अलावा एनीकटों का पानी छोड़ने के पहले किसानों को सूचित करने और तोकापाल ब्लॉक के देउरगांव में 127 करोड़ की लागत से प्रस्तावित बैराज का निर्माण जल्द कराने मांग रखी है. ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्य के बीच इंद्रावती नदी को लेकर अनुबंध के अनुसार 50 फीसदी पानी बस्तर को दिए जाने की मांगों को लेकर किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है.

इंद्रावती नदी, जो पूर्व के स्वरूप में थी, उसी स्वरूप में वापस इंद्रावती नदी को लाने के लिए पिछले 6 साल से आंदोलन कर रहे हैं. लेकिन दुख इस बात का है कि आज तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है और आज भी बस्तरवासियों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है : किशोर पारेख, सदस्य, इंद्रावती नदी बचाओ

कांग्रेस सरकार ने 2019 में की पहल : कांग्रेस सरकार में इंद्रावती विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रहे राजीव शर्मा ने बताया कि इंद्रावती नदी को बचाने के लिए बकायदा तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 30 मई 2019 में इंद्रावती प्राधिकरण का गठन किया. कांग्रेस सरकार तेजी से सूखती इंद्रावती नदी को लेकर काफी गंभीर थी. उपाध्यक्ष रहते उन्होंने नदी में पानी को रोकने के लिए दो जगह बैराज बनाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था, जिसके बाद मटनार और देउरगांव में बैराज बनाने का फैसला लिया गया.

देउरगांव में 127 करोड़ रुपए की लागत से 5 से 7 मीटर ऊंचा बैराज और चित्रकोट वाटरफॉल से करीब 6 किमी पहले मटनार में करीब 697 करोड़ रुपये की लागत से 17 मीटर ऊंचा बैराज बनाया जाना है. दोनों बैराज का स्टीमेट करीब 850 करोड़ रुपए का बनाया गया था. विधानसभा चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन हुआ और अब भाजपा सरकार को साल भर से ऊपर बीत गए हैं, लेकिन अब तक बैराज बनाने का काम शुरू नहीं हो सका है. वर्तमान सरकार सूखती इंद्रावती नदी को बचाने को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है : राजीव शर्मा, पूर्व उपाध्यक्ष, इंद्रावती विकास प्राधिकरण

भाजपा सरकार को पूर्व उपाध्यक्ष का सुझाव : वहीं जोरा नाला का निरीक्षण करके भी विशेष योजना तैयार किया गया था. वर्तमान में भाजपा सरकार को यही सुझाव है कि पिछले कार्यकाल में निर्णय लिए गए फैसले और दस्तावेजों को देखकर काम करेंगे तो निश्चित ही समस्या का समाधान होगा.

ओडिशा और छत्तीसगढ़ में पानी का बंटवारा : जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता वी.एन पांडे का कहना है कि वर्तमान में इंद्रावती नदी में 27 फीसदी पानी है. कुछ साल पहले ओडिशा और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच इंद्रावती नदी में पानी के बंटवारे को लेकर अनुबंध हुआ. इसके तहत 50-50 प्रतिशत पानी का बंटवारा करने का निर्णय लिया गया था. लेकिन वर्तमान में बस्तर की इंद्रावती नदी में केवल 27 फीसदी ही पानी है और 2.01 मीटर पानी बह रहा है.

विभाग कोशिश कर रहा है. जोरा नाला के पास बने रेत के टिले की वजह से पानी पर्याप्त नहीं रही है. इसे जल्द ही हटाने का प्रयास भी किया जाएगा. मटनार और देउरगांव में बैराज बनाया जाना है, लेकिन अब तक इसके लिए बजट पास नहीं हो पाया है. इसलिए अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है : वी.एन पांडे, कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग

वर्तमान सरकार इंद्रावती को लेकर गंभीर है. राजस्थान के उदयपुर में आयोजित कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री से बातचीत भी हुई है. जल्द ही इस पर ठोस कदम उठाया जाएगा, ताकि बस्तर को इंद्रावती नदी का पर्याप्त पानी 12 महीनों मिल सके : केदार कश्यप, जल संसाधन मंत्री, छत्तीसगढ़

इंद्रावती नदी का घटता जलस्तर बड़ी समस्या : दरअसल, लंबे समय से इंद्रावती नदी में घटते जलस्तर को लेकर बस्तरवासी सरकार को अलग तरह के आंदोलन के जरिए जगाने का प्रयास कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि ओडिशा सरकार गर्मी के मौसम में अनुबंध के खिलाफ जाकर काफी कम पानी बस्तर की ओर छोड़ती है. ओडिशा सरकार द्वारा इंद्रावती नदी पर जगह-जगह बैराज बनाने से गर्मी के मौसम में उड़ीसावासियों को तो पर्याप्त पानी मिलता है, लेकिन छत्तीसगढ़ वासियों को पानी की कमी से जूझना पड़ता है.

जोरानाला में छत्तीसगढ़ सरकार ने करोड़ों रुपये की लागत से बांध का निर्माण किया. इससे बस्तरवासियों को उम्मीद थी कि गर्मी के मौसम में बस्तरवासियों को इंद्रावती नदी का पर्याप्त पानी मिलेगा, लेकिन पिछले कई सालों से ऐसा नहीं हो रहा है. गर्मी के मौसम में नदी में जल संकट का खतरा मंडराने लगता है.

इंद्रावती नदी को बचाने के सारे दावे फेल : सालभर पहले ही 11 मार्च को पूर्व केंद्रीय जलशक्ति राज्य मंत्री विश्वेस्वर टुडू ने बस्तर पहुंचकर जोरा नाला का दौरा किया. छत्तीसगढ़ सरकार और तत्कालीन ओडिशा सरकार के बीच आपसी समझौता कर समाधान निकालने की बात कही थी. साथ ही सूखती इंद्रावती नदी की हकीकत जानने बाकायदा एक एक्सपर्ट टीम का गठन करने की बात कही थी. लेकिन वर्तमान में ना ही दोनों सरकार के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के बीच बैठक हो पाई और ना ही एक्सपर्ट टीम का गठन हो पाया. लिहाजा, एक बार फिर से सूखती इंद्रावती नदी को बचाने के सारे प्रयास के दावे फेल साबित हुए.

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