संपादकीय

सुधारों से बढ़ेगी ग्रोथ…

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कहा है कि भारत को मैक्रो-इकॉनमिक स्थिरता बनाए रखने के लिए कुछ ढांचागत सुधारों को लागू करना होगा। इन सुधारों से भारत 2047 तक विकसित बनने के सपने की ओर बढ़ पाएगा। IMF के सुझाव सही हैं और पहले भी एक्सपर्ट्स इस बात की ओर ध्यान दिला चुके हैं।

तेज ग्रोथ चाहिए:
 दरअसल, केंद्र सरकार ने विकसित भारत का जो लक्ष्य रखा है, उसके लिए देश की सालाना GDP ग्रोथ 8-9% होनी चाहिए। अभी इस लक्ष्य से देश काफी पीछे चल रहा है। IMF का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025 और अगले वित्त वर्ष यानी 2026 में भारत की GDP ग्रोथ 6.5% रह सकती है।

ग्रोथ अनुमान से कम: सरकार का अपना अनुमान इससे भी कम है। उसका मानना है कि वित्त वर्ष 2025 में ग्रोथ 6.4% रह सकती है। इस साल की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर तिमाही में 5.4% के साथ 8 वर्षों के निचले स्तर पर आ गई थी, जबकि अप्रैल-सितंबर यानी पहले 6 महीनों में ग्रोथ 6% रही। शुक्रवार को GDP ग्रोथ की तीसरी तिमाही के आंकड़े आए। इस तिमाही में ग्रोथ 6.2% रही, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में ग्रोथ 8.6% थी।

कृषि-भूमि सुधार: IMF की Article IV कंसल्टेशन रिपोर्ट में संस्था के बोर्ड ने देश की मैक्रो-इकॉनमिक नीतियों की सराहना की है। साथ ही, यह भी कहा है कि 2047 तक विकसित बनने के लक्ष्य के लिए कृषि, भूमि, श्रम और न्यायिक जैसे ढांचागत सुधार करने होंगे। हालांकि, कृषि सुधारों की कोशिश किसानों के विरोध की वजह से सरकार को वापस लेनी पड़ी थी। भूमि और न्यायिक सुधारों की कोशिश भी पहले फेल हो चुकी है। ये मुद्दे राजनीतिक तौर पर संवेदनशील हैं। इन्हें लेकर सरकार को कानून लाने से पहले आम सहमति बनानी चाहिए।

टैरिफ घटाने पर जोर: रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को टैरिफ दरों में और कमी करने की जरूरत है। इस सिलसिले में हालिया बजट में की गई पहल की सराहना करनी चाहिए, जिसमें कई चीजों पर कस्टम ड्यूटी में कमी की गई थी। दरअसल, जब तक घरेलू कंपनियां लागत और गुणवत्ता के मामले में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का मुकाबला नहीं कर पाएंगी, तब तक विदेशी बाजार में वे जगह नहीं बना पाएंगी। अगर उन्हें वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनना है तो अंतराष्ट्रीय कंपनियों से मुकाबला करना ही होगा।

तेज तरक्की की शर्त : IMF की रिपोर्ट का लब्बोलुआब यही है कि अगर देश को तेजी से तरक्की करनी है तो अगले दौर के सुधारों की ओर कदम बढ़ाना होगा। रिपोर्ट में आयात घटाने के लिए घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने वाली PLI स्कीम की तारीफ करते हुए कहा गया है कि इसे इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे कुछ क्षेत्रों में भले कामयाबी मिल जाए, लेकिन इससे बड़े पैमाने पर रोजगार बढ़ाने में सफलता नहीं मिलेगी।

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