छत्तीसगढ़

हिमालयन भालू की मौत का रहस्य बरकरार

रायपुर: एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत 15 फरवरी को नागालैंड के दीमापुर जूलॉजिकल पार्क से दो भालू रायपुर लाए जा रहे थे. जिन 2 भालुओं को रायपुर लाया जा रहा था उसमें 6 साल का नर भालू कुल्लू और 7 साल की मादा भालू बेंबू शामिल थे. रायपुर लाने के क्रम में वन विभाग की गाड़ी में मेल हिमालयन भालू कुल्लू की मौत हो गई. भालू की मौत पर अब सवाल खड़े होने शुरु हो गए हैं. कहा जा रहा है कि भालू की मौत को लेकर लोगों को अंधेरे में रखा गया.

हिमालयन ब्लैक बीयर की मौत: कहा जा रहा है कि नागालैंड से पश्चिम बंगाल के रास्ते ब्लैक बीयर के जोड़े को रायपुर लाया जा रहा था. पश्चिम बंगाल में वन्य जीव चेकिंग के नाम पर गाड़ी को काफी देर तक रोके रखा गया. देरी की वजह से भालुओं को छत्तीसगढ़ पहुंचने काफी वक्त लग गया. गर्मी की वजह से एक मेल भालू ने दम तोड़ दिया. वन्य जीव प्रेमी और पशु चिकित्सक का कहना है कि फरवरी के महीने में इस तरह की गर्मी नहीं पड़ती है कि भालू की मौत हो जाए.

वन्य जीव प्रेमी का आरोप: वन विभाग के दावों को वन्य जीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने खोखला बताया है. सिंघवी का आरोप है कि हिमालयन भालू को लाने में वन विभाग ने लापरवाही बरती. वन विभाग की गलती के चलते 1 भालू की मौत रास्ते में हो गई. सिंघवी का आरोप है कि भालू की मौत को लेकर वन विभाग ने पर्दा डालने की कोशिश की. वन्य जीव प्रेमी सिंघवी ने उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है

पशु चिकित्सक की दलील: जाने माने पशु चिकित्सक डॉ संजय जैन ने भी वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. डॉ जैन का भी कहना है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ या फिर अन्य किसी प्रदेश में ज्यादा गर्मी नहीं पड़ रही है. गर्मी की वजह से भालू की मौत हो जाए ये बात सही नहीं हो सकती. भालू की मौत के पीछे की वजह कुछ और है.

वन विभाग का मीडिया के सामने दावा: जानकारी के मुताबिक हिमालयन भालू की मौत को लेकर वन विभाग ने मीडिया के सामने दावा किया है. दावे के मुताबिक पश्चिम बंगाल में जगह जगह पर गाड़ी को चेकिंग के लिए रोका गया. गर्मी के चलते भालू को दिक्कत हुई और नतीजतन उसकी मौत हो गई. ये बात भी सामने आ रही है कि वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने पश्चिम बंगाल से वन्य जीवों की तस्करी होने की जानकारी दी थी. इस कारण से वहां के वन अधिकारी गाडियों को रोक कर जांच कर रहे थे. इसके चलते गाड़ी काफी देर तक खड़ी रही.वन्य जीव प्रेमी नितिन सिंघवी का आरोप: भालू की मौत पर वन्य जीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने कहा कि जब वन्य जीवों को लाते हैं तो सारे नियमों का पालन किया जाता है. जो कागजात होते हैं उसपर साफ लिखा गया होता है कि गाड़ी को रोका नहीं जाएगा. गाड़ी में तमाम सुविधाएं होती हैं. भालू की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगे होते हैं. सिंघवी ने कहा कि वन विभाग को पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.

वन विभाग गलत जानकारी दे रहा है. वन्य जीवों को लाने के लिए जो डॉक्यूमेंट दिए गए थे उसमें साफ तौर पर लिखा हुआ है कि लॉरी ट्रक सहित दो अन्य गाड़ियां जिन्दा जानवर ले कर जा रही हैं. रास्ते में इन्हें आवश्यक सहायता मुहैया कराई जाए. इन गाड़ियों को सुरक्षित तौर से जाने दिया जाए. वाहनों से टोल टैक्स भी नहीं जाए. अगर पश्चिम बंगाल में गाड़ियों को रोका गया तो छत्तीसगढ़ के अफसरों को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई – रितेश सिंह, वन्य जीव प्रेमी

साल 2014 में भी तेज गर्मी के मौसम में भालू ट्रेन के जरिए लाए गए थे. ट्रेन 12 घंटे हावड़ा में रुकी रही तब भी गर्मी से भालू की मौत नहीं हुई. अभी ऐसी गर्मी न तो पश्चिम बंगाल में पड़ रही है न ही छत्तीसगढ़ में. दीमापुर से जब ये भालू चले थे तब इनकी फिटनेस सर्टिफिकेट भी जारी की गई थी. जिसमें कहा गया था कि दोनों भालुओं की सेहत बिल्कुल ठीक है और ट्रांसपोर्टेशन के लिए ले जाए जा सकते हैं – नितिन सिंघवी, वन्य जीव प्रेमी


सीसीटीवी फुटेज जारी करने की मांग: नितिन सिंघवी का कहना है कि एक मिनट में तो कुछ नहीं हुआ होगा. भालू को गर्मी भी लगी होगी तो धीरे धीरे कर तबीयत बिगड़ी होगी. गाड़ियों में सीसीटीवी लगा होता है. वन विभाग के अफसर इसकी मॉनिटरिंग करते हैं. ड्राइवर भी भालू को देख सकता है. नितिन सिंघवी कहते हैं कि ऐसा कुछ नजर नहीं आता है कि भालू की तबीयत खराब हुई होगी. सिंघवी ने कहा कि रास्ते का एक वीडियो बताता है कि चेकिंग के दौरान अधिकारी स्तर का डॉक्टर वहां मौजूद नहीं था. वाहन को ढाई मिनट में ही आगे जाने दिया गया था. सिंघवी ने मांग की कि बताया जाये कि डॉक्टर कहां थे ? उनकी गाड़ी साथ साथ चल रही थी कि नहीं, इस बात की जांच टोल नाके में लगे सीसीटीवी से की जानी चाहिए.

जंगल सफारी से जब हिरण ले जाए गए तो एक डॉक्टर हिरनों के साथ गया और दूसरा हवाई जहाज से. लौटते वक्त एक डॉक्टर भालुओं के साथ आया और दूसरे डॉक्टर का कहना है कि वह हवाई जहाज से आया. जबकी अधिकारियों का कहना है कि दोनों ही डॉक्टर भालू के साथ आए. प्रधान मुख्य वन संरक्षक को बताना चाहिए कि सही क्या है – नितिन सिंघवी, वन्य जीव प्रेमी


पशु चिकित्सक की राय: रायपुर के पशु चिकित्सक डॉक्टर संजय जैन का कहना है कि देशभर में मौसम अभी अनुकूल है. मौसम इतना गर्म नहीं है कि भालू की मौत हो जाए. इस तरह के मौसम में हिमालयन भालू सरवाइव कर सकता है. मई और जून की गर्मी हो तो फिर बात अलग है.

एक जगह से दूसरी जगह पर जब जानवर ले जाते हैं तो उसकी मौत की कई वजह हो सकती है. पहला कारण स्थान परिवर्तन होता है. इसके अलावा वे तनाव में रहते हैं. लाने ले जाने के दौरान कई तरह की स्थिति बनती है जिसकी वजह से मौत हो सकती है. कई बार जानवरों की सही उम्र का पता नहीं होता है. अंदाज से उसकी उम्र आंकी जाती है. ज्यादा उम्र होना भी मौत का कारण हो सकता है. इसके अलावा जानवरों में कई बार कुछ ऐसी बीमारियां होती जिसका पता नहीं चलता है और उस बीमारी की वजह से भी उनकी मौत हो जाती है – डॉ संजय जैन,पशु चिकित्सक

जंगल सफारी के डायरेक्टर का बयान: रायपुर जंगल सफारी के डायरेक्टर गणवीर धम्मशील ने बताया कि हिमालयन भालू को दीमापुर से छत्तीसगढ़ लाने के दौरान 18 फरवरी को उसकी मौत हो गई है.

क्या है मौत की असली वजह: वन विभाग के अधिकारी सिर्फ इतना बता रहे हैं कि हिमालयन भालू की मौत छत्तीसगढ़ लाने के दौरान 18 फरवरी को हुई. भालू कुल्लू की मौत की असल वजह क्या थी ये कोई नहीं बता रहा है.

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