महाराष्ट्र

 कुंभ में जाने से रोकने के लिए प्रयागराज में ट्रेनों का ‘लॉकडाउन’, दर्जनों ट्रेनें रद्द और डायवर्ट, लाखों यात्री परेशान

मुंबई:   महाकुंभ मेला समापन के अब करीब 7 दिन बचे हैं। सूत्रों की मानें, तो 12 फरवरी को माघी पूर्णिमा के शाही स्नान के बाद से ही उत्तरप्रदेश सरकार ने प्रयागराज और आस-पास के स्टेशनों पर ट्रेनों की आवाजाही पर अस्थाई रोक लगा दी है। परेशान यात्रियों ने इसे ‘लॉकडाउन’ जैसी स्थिति बताई है। यह बदलाव 18 फरवरी से 28 फरवरी 2025 तक लागू रहेंगे। बुधवार को भी मुंबई से निकलने वाली गोदान एक्सप्रेस को रद्द करने के बाद हजारों टिकट धारी यात्रियों को अन्य ट्रेनों में जनरल टिकट खरीदकर जाना पड़ा। लोगों का कहना है कि केवल कुंभ ही नहीं, शादी या अन्य कारणों से भी लोग जा रहे हैं।

देशभर से ट्रेनें रद्द:
144 साल बाद लगे प्रयागराज के महाकुंभ मेला का आज 38वां दिन है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कुंभ मेले में आने वालों पर लगाई गई रोक के बाद रेलवे को ट्रेनों का संचालन संभालने में मुश्किल हो रही है। देशभर से प्रयागराज जाने वाली करीब 17 मेल एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, जबकि 19 ट्रेनों को डायवर्ट मार्ग से चलाया जा रहा है। इस निर्णय से लाखों यात्रियों को परेशानी हो रही है। हाल ही में नई दिल्ली और पटना स्टेशनों पर भगदड़ और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद रेलवे मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है। प्रयागराज स्टेशन और प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर ट्रैफिक कंजेशन को कम करने के लिए रेलवे ने मध्य रेलवे से होकर गुजरने वाली 8 प्रमुख ट्रेनें रद्द की हैं, जिससे करीब 32,000 यात्री प्रभावित हो रहे हैं। हर मेल एक्सप्रेस ट्रेन में औसतन 4,000 यात्री सफर करते हैं, जबकि ट्रेन की क्षमता केवल 1,700 यात्रियों की होती है। मुंबई और सूरत से होकर आने-जाने वाली मध्य रेलवे की 10 ट्रेनों के मार्ग भी डायवर्ट किए गए हैं, जिससे करीब 40,000 यात्री प्रभावित हुए हैं। इन ट्रेनों के गंतव्य तक पहुंचने में देरी हो रही है, जिससे यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है। रेलवे ने इन यात्रियों के लिए रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अब भी प्रतिक्षारत हैं लाखों लोग:
मुंबई से प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों का रद्दीकरण 18 फरवरी से शुरू हुआ है। सूत्रों के अनुसार, रद्दीकरण के बावजूद कई ट्रेनों में टिकट उपलब्ध नहीं है, स्थिति ‘रिग्रेट’ हो चुकी है। मुंबई से प्रयागराज या आसपास के लिए रोजाना करीब दो दर्जन बसें निकल रहीं है। इनके लिए आरटीओ ने अब तक 1500 से ज्यादा स्पेशल परमिट जारी किए हैं, और कुछ दिनों में और परमिट की मांग है। इन बसों का किराया ट्रेन की सेकंड एसी के बराबर पहुंच गया है, प्रति यात्री 6,000 से 8,000 रुपये तक लिया जा रहा है। मुंबई से प्रयागराज तक बसों को 35 से 40 घंटे लग रहे हैं। टूअर्स एंड ट्रैवल्स वालों ने बताया कि 18 फरवरी के बाद स्पेशल परमिट मिलना मुश्किल हो गया है, जबकि जो बसें प्रयागराज के लिए निकली हैं, वे अभी भी पहुंच नहीं पाई है। घंटों ट्रैफिक में लगना पड़ रहा है। रेलवे की ओर से ट्रेनें रद्द करने के कारण भी प्राइवेट बसों के टिकट की मांग बढ़ी। हवाई टिकट की औसतन कीमत 25 हजार रुपये प्रति यात्री है।

एनबीटी लेंस: रेलवे को क्यों लेना पड़ा रद्दीकरण का फैसला?सूत्रों के अनुसार पटना में ट्रेन के एसी कोच में तोड़फोड़ होने के बाद रेलवे ने प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों के लिए दोबारा रणनीति बनाई। एक अधिकारी ने बताया कि मध्य रेलवे से जो रनिंग स्टाफ ट्रेन लेकर प्रयागराज पहुंचे, उन्हें वहां से निकालना मुश्किल हो गया। उत्तरप्रदेश सरकार ने प्रयागराज और आसपास स्टेशनों पर ट्रेनों की आवाजाही के लिए पूरी पाबंदी लगा दी। ट्रेनों के रनिंग स्टाफ लोको पायलट और गार्ड को केवल इंजन लेकर प्रयागराज से निकलना पड़ा। इस स्थिति के कारण आखिरकार रेलवे को ट्रेनें डायवर्ट करने का फैसला लेना पड़ा।

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