पहली बार! एक साथ 39 लोगों को कोर्ट ने सुनाई सजा, 27 साल पहले किया था भ्रष्टाचार, 9 तो मर गए

सीहोर: पहले कहा जाता था कि कर्मों की सजा मौत के बाद ईश्वर के यहां मिलती है, लेकिन अब जमाना बदल गया है। बुरे काम करने वालों को इसी जनम में सजा मिल रही है। यह अलग बात है कि कोर्ट में तारीख पर तारीख से समय काफी व्यतीत हो जाता है। ऐसा ही एक मामला राजधानी भोपाल से सामने आया है। यहां पर 27 साल पहले हुए भ्रष्टाचार के एक मामले में सीहोर जिला सत्र न्यायालय ने 39 लोगों को सजा दी है।
यह सजा जिला सहकारी बैंक, साख सहकारी समितियां और एलआईसी के अधिकारियों को सुनाई गई है। जज ने 38 लोगों को जिला जेल सीहोर भेज दिया है, इन्हें तीन से लेकर पांच वर्ष तक की सजा सजा सुनाई गई है। वहीं एक अभियुक्त गंभीर रूप से बीमार है। उसकी सजा माफ कर दी गई है। दिलचस्प बात तो यह है कि यह केस इतने दिन चला कि प्रकरण में केस के दौरान 9 आरोपियों की मौत हो गई। एक आरोपी को बरी किया गया है।
एमपी के इतिहास में पहली बार
बता दें कि यह फैसला मध्य प्रदेश में सबसे पुराने लंबित ईओडब्ल्यू के प्रकरण में सीजेएम अर्चना नायडू बोर्डे ने सुनाया है। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के इतिहास में संभवत: यह पहला मामला है, जब भ्रष्टाचार के मामले में एक साथ इतने लोगों को सजा सुनाई गई है।
क्या है मामला
मामला वर्ष 1998 का है, जहां आईआरडीपी बीमा योजना के तहत सीहोर, शाजापुर और राजगढ़ जिले में जिला सहकारी बैंक समितियों में फर्जी दस्तावेज लगाकर 72 लाख रुपये की राशि का आहरण किया गया था। इसमें जिला सहकारी बैंक, साख सहकारी समितियां और एलआईसी के अधिकारी लिप्त पाए गए थे।


