GBS Virus, भारत में तेजी से बढ़ रहे केस, सरकार ने किया Health Alert!

डेस्कः सेहत को लेकर भारत के पूणे में एक बड़ी समस्या आन खड़ी हुई है। इस समय पूणे में गुइलेन-बैर सिंड्रोम नाम की बीमारी के केस तेजी से बढ़ रहे हैं लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम परिधीय तंत्रिकाओं (Peripheral Nerves) पर हमला करती है। इसके बाद शरीर में सुन्नपन, झुनझुनी और मांसपेशियों में कमजोरी, लकवा जैसे लक्षण सामने आते हैं। पूणे में लगातार GBS के मामलों में वृद्धि देखी गई है, जिसे अब तक संभवतः दूषित जल स्रोतों से जोड़ा जा रहा है इसलिए GBS के खतरे को कम करने के लिए साफ-सफाई का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। हाइजीन रहे, लगातार हाथ धोए और साफ पानी का सेवन करें।
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) बीमारी है क्या?
गुइलैन बैरे सिंड्रोम, एक ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इस बीमारी में इम्यून सिस्टम अपनी ही नर्व्स पर अटैक करता है जिसके चलते उठने-बैठने और चलने तक में समस्या होती है। कुछ लोगों को सांस लेने में मुश्किल आती है और लकवा की समस्या भी इस बीमारी का लक्षण है। बता दें कि हमारा नर्वस सिस्टम दो हिस्सों में होता है। पहला हिस्सा को सेंट्रल नर्वस सिस्टम कहते है, जिसमें रीढ़ की हड्डी और ब्रेन वाला पार्ट होता है और दूसरे हिस्से में पेरिफेरल नर्वस सिस्टम आता है, जिसमें पूरे शरीर की बाकी सभी नर्व्स होती हैं। गुइलेन बैरी सिंड्रोम में इम्यून सिस्टम नर्वस सिस्टम के दूसरे हिस्से यानी पेरिफेरल नर्वस सिस्टम पर ही हमला करता है
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़कर 166 हो गई है। महाराष्ट्र के नांदेड़ गांव में सबसे ज्यादा मरीज सामने आए हैं। नांदेड और आसपास के इलाकों में GBS के प्रकोप की जांच के लिए गठित की गई रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) के अधिकारियों के मुताबिक, नांदेड में 77 GBS मरीज हैं, जिसमें से 62 मरीजों के घरों का दौरा किया गया और पेयजल के सैंपल लिए गए जिसमें पीने के पानी में क्लोरीन की कमी पाई गई थी।
इस बीमारी को लेकर सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर किया है। नवभारत टाइमस की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले पुणे में व्यक्ति की मौत का कारण सांस लेने में तकलीफ थी। ऑटोनोमिक डिसफंक्शन, क्वाड्रिप्लेजिया और हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत सामने आई थी। ससून अस्पताल के एक अधिकारी के मुताबिक, मरीज खडकवासला का रहने वाला था, जो नांदेड़ गांव के उन इलाकों में से एक है जहां कई जीबीएस के मामले सामने आए हैं। अस्पताल में आने से मरीज को 7 दिनों तक दस्त लगे थे। अस्पताल में भर्ती होते समय मरीज की हालत गंभीर थी और उसे क्वाड्रिप्लेजिया (हाथ-पैरों का लकवा) हो गया था और वह पहले छोटे अस्पतालों में इलाज करवा रहा था।
डॉ. रोहिणी सोमनाथ पाटिल (Dr Rohini Somnath Patil) ने एक्स अकाउंट पर गुइलेन बैर सिंड्रोम से जुड़ी जानकारी शेयर की है। चलिए, आपको गुइलेन बैर सिंड्रोम होने के कारण, बचाव और कुछ शुरुआती लक्षण बताते हैं।


