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साल 2025 में आएगी मंदी !, किन कारणों ने बढ़ा दी है चिंता

नई दिल्ली: क्या दुनिया में फिर से मंदी आने वाली है? एक्सपर्ट ने दुनिया के आर्थिक हालातों को देखते हुए चिंता बढ़ा दी है। दुनिया के बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स के मुताबिक साल 2025 में दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकती है। कई देशों की अर्थव्यवस्था में अभी से तनाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। भारत में कम होती जीडीपी भी कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है।

सीएनबीसी18 के मुताबिक जर्मनी और ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था इस समय बुरे दौर से गुजर रही है। वहीं एनर्जी की कीमतों में तेजी, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका व चीन के बीच व्यापार को लेकर तनातनी ने भी मंदी की आशंका को बढ़ा दिया है।

कई देशों पर मंदी की मार!

दुनिया के हर देश पर मंदी का साया मंडरा रहा है। ब्रिटेन की जीडीपी के आंकड़े काफी खराब आ रहे हैं। संशोधित जीडीपी आंकड़े 2024 की तीसरी तिमाही में शून्य वृद्धि दिखा रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था ठहर गई है।

वहीं दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जापान भी मंदी से जूझ रहा है। कमजोर घरेलू मांग के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई। मंदी के कारण जापान में औसत घरेलू लोन की रकम औसत आय से ज्यादा हो गई है।

इस मंदी से न्यूजीलैंड भी नहीं बचा है। जुलाई-सितंबर तिमाही में इसकी जीडीपी में एक फीसदी की गिरावट आई है। साल 1991 और कोविड बाद अब ऐसा हुआ है न्यूजीलैंड का आर्थिक प्रदर्शन इतना कमजोर रहा है।

अमेरिका पर भी संकट के बादल

आर्थिक मंदी से अमेरिका भी नहीं बच रहा है। हालांकि इस स्थिति में कुछ सुधार जरूर हुआ है। गोल्डमैन सैक्स ने हाल ही में लचीले जॉब मार्केट का हवाला देते हुए अगले 12 महीनों में अमेरिकी मंदी की आशंका को 20% के पहले के पूर्वानुमान से घटाकर 15% कर दिया है। अमेरिका में मंदी की आशंका बेशक कम हुई हो, लेकिन खत्म नहीं हुई है।

टाली जा सकती है मंदी

ऐसा नहीं है कि इस वैश्विक मंदी को टाला नहीं जा सकता। जूलियस बेयर के भास्कर लक्ष्मीनारायण ने कहा, ‘मंदी का कोई संकेत नहीं है। अगर बाजार और अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है तो मूल्य निर्धारण में कुछ तनाव हो सकता है।’ उन्होंने सुझाव दिया कि मंदी नहीं, बल्कि मुद्रास्फीति अमेरिका में बड़ी चिंता हो सकती है।

ये कारण बढ़ा रहे चिंता

  • डोनाल्ड ट्रंप जनवरी में अमेरिका का राष्ट्रपति पदभार संभालने जा रहे हैं। वह चीन समेत दुनिया के कई देशों पर टैरिफ बढ़ाने वाले हैं। इससे वैश्विक व्यापार और बाधित हो सकता है जिससे आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
  • इस समय यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव भी आर्थिक मंदी की आहट का संकेत दे रहे हैं। इससे जर्मनी और फ्रांस जैसी प्रमुख यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं में संकट पैदा हो सकता है।

लेकिन स्थिति इतनी भी बुरी नहीं

ऐसा नहीं है कि मंदी आ ही जाएगी। बैंक जूलियस बेयर के मार्क मैथ्यूज ने कहा कि मंदी की भविष्यवाणी करना असंभव है। जो अर्थशास्त्री इसका पूर्वानुमान लगाते हैं, वे केवल भाग्यशाली हैं, बस इतना ही। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि उच्च बाजार मूल्यांकन और मुद्रास्फीति जोखिम जैसी कमजोरियां 2025 को विशेष रूप से नाजुक बना सकती हैं। वहीं जेपी मॉर्गन ने 2025 की पहली छमाही में वैश्विक मंदी की केवल 15% संभावना का अनुमान लगाया है।

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