संपादकीय

टीम इंडिया का ‘आत्मसमर्पण’

खेल में हार-जीत खेल का अंतरंग हिस्सा है। क्रिकेट की टीम इंडिया ने पर्थ टेस्ट मैच मेें ऑस्टे्रलिया को 295 रनों की शर्मनाक पराजय दी थी, लेकिन अब एडिलेड टेस्ट में टीम इंडिया को 10 विकेट की करारी हार झेलनी पड़ी। दरअसल ये पराजय नहीं, टीम का आत्मसमर्पण है और ऐसा खेल चिंतित करता है। टीम इंडिया ने टेस्ट चैंपियनशिप के खिताब भी जीते हैं और पिछले दो मुकाबलों में वह उप-विजेता रही है। टीम इंडिया टी-20 और एकदिनी क्रिकेट में भी विश्व चैंपियन रही है। ये संतुष्टि की दलीलें नहीं हैं। दरअसल यह टीम इंडिया का संक्रमण-काल है। बेशक विराट कोहली और कप्तान रोहित शर्मा टेस्ट क्रिकेट में भी महान बल्लेबाज रहे हैं। कोहली 9000 से अधिक रन बना चुके हैं, लेकिन अब रिकॉर्ड से आंखें मूंदनी चाहिए और खेल की हकीकत को समझना चाहिए। खेल के लिहाज से विराट और रोहित ‘उम्रदराज’ हो चुके हैं। कभी गावस्कर से लेकर सचिन तेंदुलकर तक बल्लेबाज धीमे और धूमिल हुए हैं, लेकिन बल्लेबाजों की पीढिय़ां आती रही हैं। यदि हमें शर्मनाक हार के दंश झेलने ही हैं, तो नए खिलाडिय़ों को मौका दिया जाना चाहिए। एडिलेड की पराजय आत्मसमर्पण जैसी रही है, क्योंकि तीसरे दिन ही टेस्ट मैच समाप्त हो गया। टीम इंडिया ने दोनों पारियों में ऑलआउट होते हुए कुल 486 गेंदें ही खेली। यह सबसे कम बल्लेबाजी का चौथा उदाहरण है। टीम इंडिया टेस्ट मैच में 19वीं बार 10 विकेट से हारी है। विराट ने कुल 18 रन ही बनाए और कप्तान रोहित शर्मा ने मात्र 9 रन बनाकर ही अपना दायित्व निभा दिया! रोहित एक लंबे समय से शतकीय बल्लेबाजी नहीं कर पाए हैं। भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने इन दोनों खिलाडिय़ों का सालाना अनुबंध 7 करोड़ रुपए से अधिक तय कर रखा है।

के. एल. राहुल का अनुबंध भी 5 करोड़ रुपए का है। ये एक किस्म के वेतन हैं और ‘विराट’ खिलाड़ी होने के कारण बाजार उन्हें करोड़ों रुपए के विज्ञापनों का चेहरा भी बनाता है। इतना पैसा भारत के किसी भी खिलाड़ी के हिस्से में नहीं है, लिहाजा बल्लेबाजों को अपनी राष्ट्रीय भूमिका भी समझनी चाहिए। बेशक इन खिलाडिय़ों की बल्लेबाजी बेजोड़ रही है, लेकिन देश यह अपेक्षा नहीं करता कि ‘विराट’ बल्लेबाज शून्य पर अथवा 5-7 रन बनाकर ही पैवेलियन लौटते रहें। नए बल्लेबाजों में सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल बहुत अच्छे और ठोस खिलाड़ी हैं, लेकिन उनका खेल बेहद ‘अनिश्चित’ है। टीम इंडिया के कथित विख्यात बल्लेबाज दोनों पारियों में 200 रन भी पार नहीं कर सके। पांच बल्लेबाज 50 रन के भीतर ही लुढक़ गए। एक भी बल्लेबाज ने अद्र्धशतक की पारी नहीं खेली। गेंदबाजों में सिर्फ बुमराह ही असरदार रहे और उन्होंने विकेट भी झटके। अश्विन 500 से अधिक टेस्ट विकेट ले चुके हैं, लेकिन विदेशी पिच पर वह बेजान, बेअसर ही रहे। सिराज ने हैड को शतक बनाने के बाद बोल्ड किया, लेकिन वह भी ऑस्टे्रलिया के बल्लेबाजों को बांध नहीं सके। एडिलेड की हार से टीम इंडिया वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप में पहले स्थान से तीसरे स्थान पर लुढक़ आई है। उस पर फाइनल खेलने का खतरा मंडरा रहा है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि ‘गुलाबी गेंद’ में स्विंग ज्यादा और देर तक बरकरार रहती है। आईपीएल और सीमित ओवर खेल की बहुतायत ने हमारे कथित महान बल्लेबाजों का धैर्य, गेंद छोडऩे की कला और बैकफुट खेल को प्रभावित किया है। ‘गुलाबी गेंद’ पर पॉलीयुरेथेन की चिकनी परत चढ़ाई जाती है, लिहाजा टप्पा खाकर गेंद स्किड होती है और स्विंग-स्किड के मिश्रण ने भारतीय बल्लेबाजों का खेल तबाह कर दिया है।

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