संपादकीय

चुनाव में मुफ्त घोषणाओं की होड़

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में जिस तरह से दोनों प्रमुख गठबंधनों – सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास आघाड़ी – ने चुनावी वादों का पिटारा खोल रखा है, वह बताता है कि इन दलों ने हाल के अनुभवों और अपने नेताओं की नसीहतों से कोई सीख नहीं ली है।

यह बात बार-बार कही जाती रही है कि राजनीतिक दल चुनाव के दौरान वादे करने में अतिरिक्त उदारता दिखाते हैं, जिससे एक तरफ खजाने पर बोझ बढ़ता है तो दूसरी तरफ इन दलों की साख पर भी सवाल उठते हैं। ताजा उदाहरण कर्नाटक का है, जहां अव्यावहारिक वादों के बल पर चुनाव जीतने के बाद राज्य सरकार के लिए उन्हें पूरा करना मुश्किल साबित हो रहा है। संभवत: इसीलिए उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा के वादे पर पुनर्विचार की बात कही, जिस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को उन्हें फटकार लगानी पड़ी कि उनके बयान से महाराष्ट्र के मतदाताओं को गलत संदेश जा सकता है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुफ्त की घोषणाओं पर सवाल उठाते रहे हैं।

महाराष्ट्र चुनाव अभियान पर किसी भी खेमे में इन बातों का कोई असर नहीं दिख रहा। सत्तारूढ़ महायुति (यानी BJP, शिंदे की अगुआई वाली शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली NCP) ने लाड़की बहिण योजना में दी जाने वाली राशि 1500 मासिक से बढ़ाकर 2100 मासिक करने के साथ ही नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना में किसानों को दी जाने वाली राशि भी 12000 रु मासिक से बढ़ाकर 15000 रुपये मासिक करने का वादा किया है। दूसरी ओर विपक्षी महाविकास आघाड़ी (यानी कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की अगुआई वाली शिवसेना और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP) ने महिलाओं को 3000 रुपये मासिक और मुफ्त बस सेवा देने का वादा किया है।

इन वादों से राजकोष पर पड़ने वाले बोझ की बात करें तो महायुति की लाड़की बहिण योजना में हुए इजाफे से इस पर सालाना खर्च 63000 करोड़ रुपये हो जाएगा, जो इस योजना के मौजूदा बजट में 40 फीसदी का इजाफा है। नमो शेतकरी महासम्मान निधि में भी बढ़ोतरी का वादा इसके खर्च में सालाना 25 फीसदी का इजाफा कर देगा। ऐसे ही महाविकास आघाड़ी का महिलाओं को 3000 रुपये मासिक कैश देने का वादा राजकोष पर सालाना 90,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डालेगा।

यह स्थिति तब है जब इसी जुलाई में विधानसभा में रखी गई CAG रिपोर्ट ने याद दिलाया कि राज्य पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। उसे 2.75 लाख रुपये का कर्ज अगले सात वर्षों में चुकाना है। यही नहीं 94,845.35 करोड़ रुपये का मार्केट लोन और 83,453.17 करोड़ रुपये ब्याज अगले दो वर्ष में यानी वित्त वर्ष 2025-26 तक चुकाने हैं। जाहिर है, राजनीति को थोड़ा और जिम्मेदार होने की जरूरत है।

  

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