संपादकीय

‘कठोरतम दंड के पात्र हैं’ ‘खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाले’

आज देश में कई चीजों में मिलावट पाई जा रही है। यहां तक कि स्वास्थ्य के लिए आवश्यक दूध, घी और पनीर आदि उत्पाद भी मिलावट रहित नहीं हैं जिनके इसी महीने के 10 दिनों के उदाहरण निम्न में दर्ज हैं : 

* 12 अक्तूबर को इंदौर (मध्य प्रदेश) में फूड सेफ्टी विभाग ने एक गोदाम पर छापा मार कर 800 किलो मिलावटी घी जब्त किया। 
* 14 अक्तूबर को लुधियाना में बीकानेर से मिठाइयां बनाने के लिए मंगवाया गया 600 किलो मिलावटी मावा (खोया) जब्त किया गया। 
* 15 अक्तूबर को सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) में गंगोह में 62 किलो तैयार नकली देसी घी के साथ 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
* 16 अक्तूबर को रुड़की (उत्तराखंड) में एक वाहन से 10 किं्वटल नकली पनीर जब्त किया गया। 
* 17 अक्तूबर को जयपुर के ‘केश्यावाला’ में नकली घी बनाने वाली फैक्टरी से 954 किलो देसी घी के साथ 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 

* 18 अक्तूबर को सीकर (राजस्थान) में फूड सेफ्टी विभाग की टीम ने 270 लीटर मिलावटी देसी घी जब्त किया। 
* 18 अक्तूबर को ही अलवर (राजस्थान) में फूड सेफ्टी विभाग ने 150 किलो खराब पनीर और 400 लीटर मिलावटी दूध नष्टï करवाया। 
* 18 अक्तूबर को ही दिल्ली में फूड सेफ्टी विभाग ने ‘मोरी गेट’ स्थित थोक खोया मंडी में छापेमारी करके 430 किलो मिलावटी खोया जब्त किया।  
* 20 अक्तूबर को ग्वालियर (मध्य प्रदेश) से बस द्वारा इंदौर भेजा गया मिलावटी 1000 किलो मावा (खोया) जब्त किया गया। 
* 20 अक्तूबर को ही बीकानेर में 795 किलो नकली घी पकड़ा गया।
* 20 अक्तूबर को ही रायबरेली (उत्तर प्रदेश) में छापेमारी के दौरान लगभग 70 क्विंटल सिंथैटिक पनीर तथा 14 बोरी मिल्क पाऊडर जब्त किया गया।
* 23 अक्तूबर को भीलवाड़ा (राजस्थान) में 1000 किलो मिलावटी मावा (खोया) और इससे बनी मिठाइयां जब्त की गईं। 

इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका में याची एडवोकेट सुनैना ने कहा है कि पंजाब में देसी घी के 21 प्रतिशत और खोए के 26 प्रतिशत नमूने न्यूनतम मापदंडों को पूरा करने में विफल रहे हैं। याची ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि भारत के 70 प्रतिशत से अधिक दुग्ध उत्पाद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मापदंडों पर खरे नहीं उतरते हैं। अत: यदि भारत के दुग्ध उत्पादों की जांच नहीं की गई तो 2025 तक 87 प्रतिशत भारतीय कैंसर जैसी घातक बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। याची के अनुसार विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 89.2 प्रतिशत दुग्ध उत्पादों में किसी न किसी प्रकार की मिलावट पाई गई है। इसी पृष्ठïभूमि में याची द्वारा हाईकोर्ट से अपील की गई कि राज्य सरकार को निर्देश जारी कर दूध और उससे बनने वाले उत्पादों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए। 

याची के अनुसार नकली दूध बनाने में डिटर्जैंट, कास्टिक सोडा, सफेद पेंट, हाइड्रोपैराआक्साइड वनस्पति तेल, फर्टीलाइजर जैसे घातक पदार्थों का इस्तेमाल होता है। याचिका में इस मामले में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग भी की गई है। उक्त याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू पर आधारित पीठ ने कहा कि पंजाब में मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों की  बिक्री की बढ़ती समस्या पर काबू पाने में सरकार विफल दिखाई दे रही है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जहां माननीय अदालत ने इस संबंध में राज्य सरकार से जवाब मांगा है, वहीं शिवसेना समाजवादी द्वारा जालंधर में सिविल सर्जन दफ्तर में अधिकारियों को ज्ञापन सौंप कर मिठाई बनाने के लिए सिंथैटिक दूध और घटिया क्वालिटी के पनीर का इस्तेमाल करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की गई है। 

मिलावटी दूध से पेट में ऐंठन,अपच, कब्ज, हैजा, त्वचा रोग, डायरिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं जबकि अधिक मात्रा में नकली खोए से बनी मिठाई खाने से लिवर को नुक्सान के अलावा कैंसर तक हो सकता है और किडनियां भी फेल हो सकती हैं। अत: दूध एवं अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट करके लोगों को बीमार करने वाले मिलावटखोर व्यापारियों को कठोरतम दंड दिया जाना चाहिए ताकि वे अपनी समाज विरोधी करतूतों से बाज आएं।

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