राजनीति

महाराष्ट्र चुनाव में शाह को किस बात से लग रहा है डर? महायुति के नेताओं से कहा बागियों पर…

नई दिल्ली: महाराष्ट्र चुनाव न तो महायुति और न ही महाविकास अघाड़ी के लिए इतना आसान है। वजह भी साफ है कि दोनों ही गठबंधन में तीन-तीन बड़े दल हैं और यहां लड़ाई दो दलों के बीच न होकर दो गठबंधन के बीच है। चुनाव में दो गठबंधनों के बीच लड़ाई दिखेगी लेकिन चुनाव से पहले इन गठबंधनों की अपनी ‘लड़ाई’ है। नामांकन की तारीख करीब आते-आते और कई राउंड की मीटिंग के बाद आखिरकार दोनों गठबंधनों के अंदर बात सीटों को लेकर बनती दिख रही है। महाविकास अघाड़ी के बाद गुरुवार दिल्ली में महायुति की भी मीटिंग हुई।

अमित शाह ने महायुति के नेताओं से क्या कहा
एक ओर जहां काफी खींचतान के बाद महाविकास अघाड़ी में बुधवार सीटों को लेकर बात बनी तो वहीं अगले दिन महायुति की भी बैठक हुई। बैठक दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर हुई। बीजेपी ने एक लिस्ट महाराष्ट्र में अपनी जारी कर दी है और कुछ सीटों को लेकर जो पेच फंसा था उस पर भी महायुति के बीच लगभग बात बन गई है। अमित शाह से मीटिंग के लिए महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे के साथ ही साथ दोनों डिप्टी सीएम भी पहुंचे। सूत्रों के अनुसार इस मीटिंग में अमित शाह ने सीटों के साथ ही साथ चुनाव के दौरान बागियों को लेकर खास हिदायत दी है।

हरियाणा जीत तो गए लेकिन सबक भी है

हरियाणा चुनाव में बीजेपी ने सभी को चौंकाते हुए जीत की हैट्रिक लगाई। इस चुनाव में बीजेपी को जीत तो मिली लेकिन बागियों ने पार्टी की टेंशन पूरे चुनाव बढ़ाए रखी। हरियाणा में कई नेता जिनको टिकट नहीं मिला वह बागी हो गए और निर्दलीय पार्टी के खिलाफ ताल ठोकते नजर आए। सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र को लेकर गुरुवार दिल्ली में हुई मीटिंग में अमित शाह की नजर महायुति के बागियों पर थी। अमित शाह ने सीएम एकनाथ शिंदे और अजित पवार को सलाह देते हुए कहा कि महायुति में शामिल दल के बागी चुनाव नहीं लड़े। अमित शाह ने कहा कि तीनों दल-बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी मिलकर चुनाव लड़ें।

बागियों को कितना कर पाएंगे कंट्रोल
यहां बागियों की बात हो रही है तो उसे थोड़ा समझना होगा। चुनाव में हमेशा ऐसा होता है कि टिकट चाहने वाले कई होते हैं और उनकी ओर से काफी दिनों पहले से तैयारी की जाती है। आखिरी वक्त में जब टिकट कटता है तो इनमें से तो कुछ मान जाते हैं लेकिन कुछ चुनाव लड़ने पर अड़े रहते हैं। जिनको टिकट नहीं मिलता वह दूसरे दलों में ट्राई करते हैं या फिर निर्दलीय मैदान में होते हैं। महाराष्ट्र में इस बार भी ऐसा होगा और हर चुनाव में होता है। लेकिन अमित शाह ने गठबंधन के नेताओं से कहा है कि ऐसे नेताओं पर नजर रखी जाए और उन्हें मनाया जाए। यदि वह मैदान में आते हैं तो भले ही कितना भी कम वोट पाएं नुकसान महायुति का ही होगा।

23 नवंबर को ही पता चलेगा किसकी रणनीति कामयाब
महाराष्ट्र लोकसभा चुनाव में महायुति का प्रदर्शन निराशाजनक था लेकिन हरियाणा के नतीजों ने बीजेपी का उत्साह दोगुना कर दिया है। महायुति के नेताओं को उम्मीद है कि यहां भी गठबंधन की दोबारा से वापसी हो सकती है। यही वजह है कि महायुति में शामिल सभी दल फूंक फूंक कर कदम आगे बढ़ा रहे हैं। महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक तमाम छोटी-बड़ी चीजों पर नजर रखी जा रही है। इन चुनावों में संघ भी एक्टिव नजर आ रहा है। दोनों गठबंधनों के बीच की लड़ाई में बाजी कौन मारेगा यह 23 नवंबर को ही पता चलेगा और उसी दिन यह भी पता चलेगा कि किसकी रणनीति कितनी कारगर रही।

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