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पीएम के रूस जाने से पहले भारत और चीन के बीच कैसे बनी ये बात ?

भारत और चीन जिस समझौते पर पहुंचते हुए दिखाई दे रहे हैं उसे भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के कुछ दिन पहले दिए गए बयान से भी समझा जा सकता है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले महीने न्यूयॉर्क में कहा था कि भारत-चीन सीमा विवाद में 75 प्रतिशत प्रगति हुई है, जो पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की वापसी से संबंधित है। एस जयशंकर ने साथ ही यह भी कहा था कि बातचीत चल रही है और तनाव कम करने की आवश्यकता है। भारत-चीन संबंध एशिया और दुनिया के भविष्य को प्रभावित करेंगे। इस कार्यक्रम में जयशंकर ने जोर देकर कहा, मुझे लगता है कि भारत-चीन संबंध एशिया के भविष्य की कुंजी है। चीन के साथ भारत का संबंध न केवल एशिया के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि इस तरह से शायद दुनिया के भविष्य को भी प्रभावित करेगा।

भारत और चीन के बीच तनाव क्या कम होता हुआ दिखाई दे रहा है। भारत और चीन के बीच कई दौर की बातचीत के बाद आखिरकार वास्तिवक नियंत्रण रेखा पर पेट्रोलिंग के लिए एक निश्चित व्यवस्था के लिए दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को कहा कि भारतीय और चीनी वार्ताकार पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त के लिए एक समझौते पर पहुंचे हैं। इस बड़े डेवलपमेंट की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूसी शहर कजान की यात्रा से एक दिन पहले हुई है। यह भी माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक कर सकते हैं। वहीं इस पूरे एपिसोड में रूस के बयान को भी काफी अहम माना जाना रहा है।

पुतिन देना चाहते हैं एक खास मैसेज
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सहित दुनियाभर के कई नेताओं की मेजबानी करने के लिए तैयार हैं। ये सभी नेता ब्रिक्स समूह के शिखर सम्मेलन के लिए रूस के शहर कजान में होंगे। इसी के साथ यूक्रेन में जारी युद्ध और पुतिन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट की वजह से रूस के राष्ट्रपति के अलग-थलग पड़ने की संभावनाएं खारिज होती दिखेंगी। विकासशील देशों के समूह ‘ब्रिक्स’ का उद्देश्य पश्चिमी नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को संतुलित करना है। शुरुआत में इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे लेकिन इस साल इसका तेजी से विस्तार हुआ। पुतिन की कोशिश है कि वह इस समिट के जरिए एक मैसेज पश्चिमी देशों को दें।

रूस-भारत और चीन, क्या है इसका संदेश

BRICS समिट से ठीक पहले रूस के विदेश मंत्री ने एक बड़ा बयान दिया। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रूस-भारत-चीन की तिकड़ी को लेकर कहा कि कुछ सालों से ये देश औपचारिक तौर पर नहीं मिले हैं लेकिन आज भी ये मजबूत संबंध रखते हैं। लावरोव ने कहा कि कोविड और कुछ दूसरी वजहों से इन देशों के बीच मीटिंग नहीं हो सकी थी। रूस के विदेश मंत्री ने कहा कि 90 के दशक तक तीनों देशों की नियमित बैठकें होती थीं। बाद में इसका विस्तार हुआ और BRICS सामने आया। जनवरी 2024 में चार और नए देश इसमें शामिल हुए।

एक बार फिर इस दिशा में आगे बढ़ रहा रूस
भारत और चीन के बीच डोकलाम में जब दोनों देशों के बीच तनाव हुआ था तो उस गतिरोध को कम करने में रूस ने अहम भूमिका निभाई थी। वहीं, तीन साल पहले गलवान में दोनों देशों की फौज के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन कई दौर की बातचीत कर चुके थे, लेकिन तनाव खत्म करने के लिए उनके बीच कोई सहमति नहीं बन पा रही थी। BRICS समिट से पहले दोनों देशों के बीच समझौते को कई तरह से आंका जाएगा। वहीं इस सम्मेलन के जरिए रूस यह प्रदर्शित करेगा कि वह वास्तव में एक अहम खिलाड़ी है जो ऐसे नए समूह का नेतृत्व कर रहा है। रूस इस समिट में भारत और चीन जैसे अहम देशों के साथ व्यापार बढ़ाने और पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार करने के बारे में बात कर सकता है।

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