संपादकीय

धारा 370 हटने के बाद’विधानसभा चुनाव’…

जम्मू-कश्मीर राज्य में चुनाव करवाने की राह में सबसे बड़ी चुनौती कानून व्यवस्था की है। हाल ही में जम्मू क्षेत्र में आतंकवादी घटनाएं बढऩे के कारण प्रशासन ङ्क्षचतित है परंतु 11 अगस्त को उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने चुनाव शांतिपूर्ण व निष्पक्ष होने का विश्वास व्यक्त किया तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी चुनावों के लिए पर्याप्त सुरक्षा कर्मी उपलब्ध करवाने पर सहमति व्यक्त की है। इन चुनावों की एक विशेष बात यह भी है कि इनमें कश्मीरी पंडितों के लिए भी 2 सीटें रिजर्व रखी गई हैं।

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय पीठ ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने का फैसला बरकरार रखते हुए केंद्र सरकार को इस वर्ष सितम्बर तक इस राज्य में चुनाव करवाने का आदेश दिया था। इसी के अनुरूप निर्वाचन आयोग के प्रमुख राजीव कुमार तथा अन्य अधिकारियों ने राज्य का दौरा करके राजनीतिक नेताओं और अधिकारियों के साथ बैठकें करके चुनावों के लिए वातावरण अनुकूल पाने पर जम्मू-कश्मीर तथा हरियाणा में विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी है। 

इसके अनुसार जम्मू-कश्मीर में 18 और 25 सितम्बर एवं 1 अक्तूबर को 3 चरणों में तथा हरियाणा में एक ही चरण में 1 अक्तूबर को मतदान होगा और दोनों के चुनाव परिणाम एक साथ 4 अक्तूबर को घोषित होंगे। हरियाणा विधानसभा का कार्यकाल इस वर्ष 3 नवम्बर को पूरा हो रहा है। 2014 में जम्मू-कश्मीर में अंतिम बार विधानसभा चुनाव हुए थे। उनमें पी.डी.पी. ने सर्वाधिक 28 सीटें जीती थीं तथा 25 सीटें जीतने वाली भाजपा के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई थी जो दोनों पार्टियों के नीतिगत मतभेदों के कारण कायम न रह सकी और 2018 में महबूबा के मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र के बाद से जम्मू-कश्मीर बिना चुनी हुई सरकार के चल रहा है। जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त, 2019 को धारा 370 हटाने और इसका विशेष दर्जा समाप्त करके इसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने के बाद वहां पहली बार चुनाव होने जा रहे हैं। 

राज्य में चुनाव करवाने की राह में सबसे बड़ी चुनौती कानून व्यवस्था की है। हाल ही में जम्मू क्षेत्र में आतंकवादी घटनाएं बढऩे के कारण प्रशासन ङ्क्षचतित है परंतु 11 अगस्त को उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने चुनाव शांतिपूर्ण व निष्पक्ष होने का विश्वास व्यक्त किया तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी चुनावों के लिए पर्याप्त सुरक्षा कर्मी उपलब्ध करवाने पर सहमति व्यक्त की है। इन चुनावों की एक विशेष बात यह भी है कि इनमें कश्मीरी पंडितों के लिए भी 2 सीटें रिजर्व रखी गई हैं। जम्मू-कश्मीर में मतदान की घोषणा से पहले पुलिस विभाग में बड़े फेरबदल करते हुए 27 भारतीय पुलिस सेवा (आई.पी.एस.) और कश्मीर पुलिस सेवा (के.पी.एस.) अधिकारियों के अलावा 89 भारतीय प्रशासनिक सर्विस (आई.ए.एस.) और कश्मीर प्रशासनिक सर्विस (के.ए.एस.) अधिकारियों का तबादला करने के साथ-साथ 3 जिलों के डिप्टी कमिश्नर भी बदल दिए गए हैं। निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार का कहना है कि ‘‘जम्मू-कश्मीर  में चुनाव के लिए वहां हर किसी में भारी उत्सुकता है और वहां की जनता भी प्रदेश की तस्वीर बदलना चाहती है।’’ गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, ‘‘ये चुनाव लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करके विकास के नए दौर के द्वार खोलेंगे।’’

जम्मू-कश्मीर चुनावों की घोषणा से प्रसन्न नैकां सुप्रीमो फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘आज बहुत मुबारक दिन है। मैं बहुत खुश हूं। निर्वाचन आयोग को चाहिए कि वह सभी को ‘प्लेइंग फील्ड’ दे।’’ उमर अब्दुल्ला के अनुसार,‘‘24 घंंटे में इतने तबादले कैसे? इस बारे मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखेंगे।’’‘डैमोक्रेटिक प्रोग्रैसिव आजाद पार्टी’ के प्रमुख गुलाम नबी आजाद का कहना है कि‘‘ निर्वाचन आयोग के फैसले का स्वागत है। जनता को अपना नुमाइंदा चुनने का मौका मिलेगा। जनता जिसे चाहेगी, सत्ता सौंपेगी।’’आशा करनी चाहिए कि दोनों ही राज्यों में मतदान सुचारू रूप से सम्पन्न होगा और लोगों को अपनी पसंदीदा सरकारें मिलेंगी, जो आम लोगों के हित में काम करेंगी।

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