छत्तीसगढ़ फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार पर अवैध भत्ता लेने के आरोप काउंसिल के सदस्यों ने लगाए हैं, बर्खास्तगी की मांग

रायपुर. रजिस्ट्रार अश्वनी गुर्देकर भत्ता लेने का प्रावधान नहीं होने के बावजूद भी मानदेय और वाहन भत्ता ले रहे हैं. जो नियमों के खिलाफ है. यह आरोप आईपीए और छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के सदस्यों समेत पूर्व सदस्यों ने लगाए हैं. आरोप है के साथ ही काउंसिल के सदस्यों ने रजिस्ट्रार को पद से बर्खास्त करने की मांग की है.
आईपीए और काउंसिल के वर्तमान और पूर्व सदस्य रजिस्ट्रार अश्वनी गुर्देकर पर आरोप लगा रहे हैं कि वे काउंसिल को लूट रहे हैं. उन्होंने कहा कि तृतीय वर्ग कर्मचारी को नियमों के खिलाफ रजिस्ट्रार बनाया गया है, जो कि DDO पावर के लिए अयोग्य है. वहीं इस मामले में काउंसिल के अध्यक्ष अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि काउंसिल के नियम कानून बनाना आसान नहीं है, यह सदन में तय होता है. दूसरी उन्होंने यह भी कहा कि सैलरी और भत्ता का प्रावधान काउंसिल में किया है गया है. मध्यप्रदेश संचालित बायलॉज (उपनियम) छत्तीसगढ़ में भी लागू है.
काउंसिल के मनोनीत सदस्य डॉक्टर राकेश गुप्ता ने इस मामले में कहा कि उपनियम (Bylaws) बदलाव में इसके लिए स्वास्थ्य संचालक और स्वास्थ्य सचिव की सहमति नहीं मिली है, सीधा-सीधा इसमें गबन का मामला बनता है. इस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पूर्व के रजिस्ट्रार भी संविदा कर्मचारी थे, उन्होंने भी तमाम फायदे लिए, इसमें भी कार्रवाई होनी चाहिए.
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस मामले में कहा कि बायलॉज (Bylaws) में कोई संशोधन नहीं हुआ है और न ही राज्य सरकार की ओर से कोई संशोधन जारी हुआ है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सचिव मनोज पिंगवा ने बताया, जिसके बाद यह मामला भी संज्ञान में आया है. मामले में जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी. ना कोई राजपत्र में संशोधन हुआ है ना ही कोई नया नियम बनाया गया है.



