बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद देश छोड़कर भागी शेख हसीना, दिया प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा

भारतबांग्लादेश में तख्तापलट के बाद देश छोड़कर भागी शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और वह देश छोड़कर भारत आ गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शेख हसीना को सेना प्रमुख की ओर से 45 मिनट का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद जबरन निर्वासित कर दिया गया।
पड़ोसी बांग्लादेश इन दिनों हिंसा की आग में जल रहा है। नौकरी में आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर रविवार को भड़की हिंसा में 14 पुलिसकर्मियों सहित 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। पूरे देश में कर्फ्यू लगाया गया है और पुलिस को हटाकर पूरे देश में सेना की तैनाती कर दी गई है। इसी बीच खबर आ रही है
शेख हसीना के राजधानी ढाका छोड़ने की सूचना के साथ उनके इस्तीफे की मांग कर रहे लोग पीएम हाउस में घुस गए हैं। बांग्लादेश के पीएम के निवास गोनो भवन के दरवाजे खोलते हुए लोग अंदर घुसे और यहां जश्न मनाया। दोपहर करीब तीन बजे गोनो भवन के दरवाजे खोल दिए और लोग प्रधानमंत्री आवास के परिसर में प्रवेश कर गए। सुरक्षाकर्मी या पुलिस का कोई कर्मचारी वहां नहीं दिखा। जब लोग पीएम आवास में पहुंचे तो शेख हसीना अपनी बहन के साथ यहां से जा चुकी थीं। बताया गया है कि वह जाने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड करना चाहती थीं लेकिन उनको इसकी इजाजत नहीं दी गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शेख हसीना को सेना प्रमुख की ओर से 45 मिनट का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद जबरन निर्वासित कर दिया गया। उनके देश से रवाना होने की खबर मिलते ही हजारों प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को उनके सरकारी आवास पर धावा बोल दिया। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, शेख हसीना आज अपराह्न अपने आवास से सैन्य हेलिकॉप्टर से किसी अज्ञात स्थान के लिए रवाना हो गईं। रिपोर्ट के अनुसार, वह अपनी छोटी बहन शेख रेहाना के साथ ‘सुरक्षित स्थान’ के लिए रवाना हुई हैं।
सोमॉय न्यूज टीवी ने दावा किया कि सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना ने सेना प्रमुख को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद देश छोड़ दिया। उन्होंने अपनी पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग (एएल) के संसदीय चुनावों में बड़ी जीत हासिल करने के बाद इस वर्ष जनवरी में देश की प्रधानमंत्री के रूप में लगातार चौथी बार कार्यकाल संभाला था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में गत जून से जारी अशांति में 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे यह बंगलादेश के इतिहास में नागरिक अशांति का सबसे घातक दौर बन गया है। एक दिन पहले यानी रविवार को देश भर में हुई हिंसक झड़पों में करीब 100 लोग मारे गए। देश में कोटा विरोधी प्रदर्शन जून में शुरू हुए, जब उच्च न्यायालय ने 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के लिए 30 प्रतिशत कोटा बहाल कर दिया। न्यायालय ने 2018 के उस फैसले को पलट दिया गया था, जिसमें ऐसे कोटा समाप्त कर दिए गए थे।
वहीं, सेना प्रमुख जनरल वकर उज जमां ने कहा कि देश में अब अंतरिम सरकार बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार बनाने का फैसला सभी पक्षों से बातचीत के बाद लिया गया है। वहीं, आर्मी चीफ ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। आर्मी चीफ ने प्रेस वार्ता का आयोजन कर कहा कि आपकी मांगों को हम पूरा करेंगे, लेकिन आप तोड़फोड़ से दूर रहिए। आप लोग हमारे साथ चलेंगे तो हम स्थिति बदल देंगे।



