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बजट, विपक्ष की थाली खाली नहीं

वित्त मंत्री तो क्या, प्रधानमंत्री भी अपने ही पक्ष की थाली को खाली नहीं रख सकते। ऐसा नहीं किया जा सकता, यह विपक्ष भी जानता है, लिहाजा बजट के मुद्दे पर संसद परिसर में ही विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सांसदों का विरोध-प्रदर्शन, पोस्टरबाजी और नारेबाजी तथा दोनों सदनों से बहिर्गमन करना बेमानी है।

  विपक्ष ने बजट को दुराग्रही, भेदभावी और सत्यानाशी तक करार दिया है। अंतिम शब्द घोर ‘असंसदीय’ है। विपक्ष की सोच बेहद नकारात्मक लगती है। विपक्ष के समवेत आरोप हैं कि गैर-भाजपा शासित राज्यों को ठन-ठन गोपाल रखा गया है। उन्हें कुछ भी नहीं मिला। उनके हिस्से की राशि भी केंद्र सरकार जारी नहीं कर रही। ये भाजपा के राजनीतिक पूर्वाग्रह हैं, लिहाजा बजट संविधान-विरोधी, संघीय ढांचे के खिलाफ, राजनीतिक खुन्नस का बजट है। यह अन्यायपूर्ण है, किसान-गरीब विरोधी है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा है कि आंध्रप्रदेश और बिहार की थालियों में पकौड़े-जलेबी परोसे गए हैं, शेष थालियां खाली हैं। करीब 90 फीसदी राज्यों को कुछ नहीं दिया गया। खडग़े जैसे वरिष्ठ और बुजुर्ग सांसद की यह टिप्पणी ही पूर्वाग्रही है, अतिरंजनापूर्ण है। उनसे सवाल है कि क्या इस तरह देश का आम बजट बनाया जा सकता है? यह संपूर्ण और राष्ट्रीय बजट राज्यों का निजी बजट नहीं है, बल्कि देश के संसाधनों और मंत्रालयों का हिसाब-किताब है। क्या यह भाजपा-एनडीए का घरेलू बजट है, जिसकी बंदरबांट कर ली गई? जहां तक बजट-भाषण में राज्यों के नाम का सवाल है, तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उप्र, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश आदि राज्यों का बजट-भाषण में उल्लेख तक नहीं किया। सरकार ने ‘पूर्वोदय’ योजना की घोषणा की है, जिसमें बिहार, बंगाल, ओडिशा, झारखंड, आंध्रप्रदेश आदि राज्यों को रखा गया है। बहरहाल जिन राज्यों का जिक्र हमने किया है, उनमें से अधिकतर भाजपा-एनडीए शासित हैं।

वित्त मंत्री तो क्या, प्रधानमंत्री भी अपने ही पक्ष की थाली को खाली नहीं रख सकते। ऐसा नहीं किया जा सकता, यह विपक्ष भी जानता है, लिहाजा बजट के मुद्दे पर संसद परिसर में ही विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सांसदों का विरोध-प्रदर्शन, पोस्टरबाजी और नारेबाजी तथा दोनों सदनों से बहिर्गमन करना बेमानी है। आरोपों के पलटवार में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन योजनाओं का खुलासा किया है, जिनके लिए बजट में आवंटन किया गया है। वित्त मंत्री ने 76,000 करोड़ रुपए की बंदरगाह का उल्लेख किया है, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। उसका उल्लेख बजट में करना अनिवार्य है, क्योंकि बंदरगाह के लिए राशि जारी होनी है। उप्र के संदर्भ में बुंदेलखंड के 7 जिलों में प्राकृतिक खेती, कुल 12 औद्योगिक पार्कों में से 2 पार्क उप्र में, 1000 से अधिक आईटीआई में से 100 से अधिकतर ऐसे संस्थानों को उप्र में ही अपग्रेड किया जाना है, इंटर्नशिप योजना में 2 लाख से अधिक युवा उप्र के, मुफ्त अनाज योजना में सर्वाधिक लाभार्थी उप्र के, प्रधानमंत्री पक्का घर योजना के नए चरण में सबसे अधिक मकान उप्र में बनेंगे, 20000 करोड़ का कर्ज ब्याज के बिना 50 साल की अवधि के लिए और 2.23 लाख करोड़ रुपए की हिस्सेदारी केंद्रीय टैक्स में आदि ऐसे विषय हैं, जिनका उल्लेख बजट में है। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु पर भी विपक्ष के दावे ठीक नहीं हैं।

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