संपादकीय

दोस्ती जिंदाबाद

भारत-रूस के बीच दोस्ती का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि रूस का यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका समेत तमाम यूरोपिय देश रूस से संबंध कर लिया था और भारत के साथ कुछ अन्य समर्थक देशों को रूस से संबंध न रखने का दबाव बनाया था। बावजूद इसके भारत इन दबावों में नहीं आया और रूस से संबंध बनाए रखा।इतना हा नहीं अमेरिकी चेतावनी के बावजूद भी भारत रूस से सस्ते में तेल लेना जारी रखा। जो आज भी जारी है। ‘

यह परम दोस्ती’ प्रधानमंत्री मोदी और  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ही नहीं है। यह दोस्ती गंगा और वोल्गा नदियों की दो संस्कृतियों के बीच है। यह दोस्ती भारत और रूस के जन-जन की है। यह दोस्ती उन रूसी युवतियों में भी निहित है, जो कत्थक, ओडिशी, भरत नाट्यम सरीखे भारतीय शास्त्रीय नृत्य सीख रही हैं और नृत्य से पहले घुंघरुओं को आंख और मस्तक से छुआती हैं। नमन और सम्मान की अभिव्यक्ति करती हैं। यह दोस्ती की मिसाल ही है कि 1951 की फिल्म ‘श्री 420’ का गीत ‘…सर पे लाल टोपी रूसी…’ आज की रूसी पीढ़ी भी गुनगुनाती है। फिल्मों ने भारत-रूस की संस्कृति का मिलन कराया है और उन्हें विस्तार दिया है। इससे गहरी दोस्ती और क्या होगी कि रूसी भाषा का जुड़ाव और कुछ उद्गम संस्कृत भाषा से है। आज भी संस्कृत मूल के ढेरों शब्द रूस में इस्तेमाल किए जाते हैं। दरअसल भारत और रूस की दोस्ती वक्त और विश्वास की कसौटी पर जांची-परखी है। प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि जब भी ‘रूस’ शब्द सामने आता है, तो उसके मायने होते हैं-सुख-दुख का साथी। रूस ने युद्ध काल में भी इस दोस्ती को साबित किया है। भारत की सामरिक शक्ति के अस्त्रों-शस्त्रों, मिसाइल, एयर डिफेंस, यानी हथियारों की 60-70 फीसदी ताकत ‘रूसी’ ही है और वह सौ फीसदी भरोसेमंद साबित हुई है। भारत की परमाणु ऊर्जा का आधार ही रूसी रिएक्टर हैं। रूस ऐसे 6000 मेगावाट के रिएक्टर भारत में स्थापित करेगा। अब दोस्ती यहां तक परवान चढ़ चुकी है कि दोनों देशों के रक्षा वैज्ञानिक साझा शोध करें और आधे-आधे उपक्रम दोनों देशों में स्थापित किए जाएं। रूस ने भारत को आश्वस्त किया है कि जो प्रौद्योगिकी उसे दी जाएगी, वह अन्य किसी देश के साथ साझा नहीं की जाएगी। भारत की सुरक्षा और दोस्ती जिंदाबाद…! अब प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन मॉस्को में 17वीं बार मिले हैं। प्रधानमंत्री 10 साल के कार्यकाल में 6 बार रूस गए हैं  और पुतिन 4 बार भारत आए हैं। वैसे यह मुलाकात भारत-रूस के 22वें सालाना शिखर सम्मेलन का हिस्सा थी। यह दोस्ती की वजह से ही संभव हो सका कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘परम मित्र’ पुतिन के सामने बैठकर यूक्रेन युद्ध का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जब मासूम बच्चों को मरते हुए देखते हैं, तो दिल छलनी हो उठता है और वह दर्द बड़ा भयानक होता है। प्रधानमंत्री ने ‘दोस्त पुतिन’ को एक बार फिर सलाह दी कि युद्ध से कोई समाधान नहीं निकला करता।

बातचीत से ही शांति, स्थिरता के रास्ते खुलते हैं। इस दोस्ताना सलाह के मायने स्पष्ट थे और राष्ट्रपति पुतिन ने इस नेक सलाह और कोशिश के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने उन भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश भेजने का आश्वासन भी राष्ट्रपति पुतिन से ले लिया, जिन्हें बरगला कर रूसी सेना में शामिल करा दिया गया था और वे यूक्रेन के मोर्चे पर जंग का हिस्सा रहे हैं। ऐसे भारतीयों की संख्या 35 से 50 बताई गई है। ऐसे आश्वासन ‘दोस्ती’ के चलते ही संभव हैं। अलबत्ता किसी भी देश के शीर्ष नेता सेना के मामले में हस्तक्षेप नहीं करते। बहरहाल दोनों ‘परम मित्रों’ ने 2030 तक द्विपक्षीय कारोबार 100 अरब डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य तय किया है। फिलहाल यह कारोबार 65 अरब डॉलर का है। यह दोस्ती की ही दरकार थी कि राष्ट्रपति पुतिन ने अपने निजी आवास पर रात्रि भोज के लिए प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया। दोनों दोस्तों ने 4-5 घंटे तक खूब बातें कीं। जाहिर है कि द्विपक्षीय के अलावा अंतरराष्ट्रीय संदर्भों में भी बातचीत हुई होगी! उनके साथ सिर्फ दो दुभाषिए थे। कोई मंत्री, कोई अधिकारी और अन्य कर्मचारी मौजूद नहीं थे। यह दोस्ती का अपनापन भी था और संवाद की गोपनीयता भी जरूरी थी। भारत-रूस के शीर्ष नेताओं की मुलाकात और बातचीत पर अमरीका समेत नाटो के 32 सदस्य देशों की भी निगाहें टिकी थीं। बहरहाल रूस से हमारी वार्ता पर यूक्रेन की तीखी प्रतिक्रिया आई है।

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