संपादकीय

दनादन क्रिकेट में विश्व विजेता

टीम इंडिया पराजय के जबड़े से ‘अतुलनीय जीत’ छीन कर लाई है। 17 लंबे सालों की प्रतीक्षा और निरंतर संघर्ष के बाद टीम इंडिया दोबारा विश्व चैम्पियन बनी है। टीम इंडिया 2007 में भी, महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में, दनादन क्रिकेट की सर्वप्रथम विश्व विजेता बनी थी। यह आत्मविश्वास, धैर्य, जीतने के जज्बे और एकसूत्र में बंधी टीम की शानदार जीत है। देश खुशी से झूम रहा है। असंख्य देशवासियों ने अनगिनत दुआएं भी दी होंगी। पूजा-पाठ भी किए गए। यह जीत अकल्पनीय, अप्रत्याशित और आशातीत नहीं है, क्योंकि टीम इंडिया कई बार जीत की दहलीज तक पहुंच कर ठिठकती और पराजित होती रही है। विश्व विजेता बनने के लिए कमाल की बल्लेबाजी, सटीक और स्विंगर गेंदबाजी, चुस्त और असंभव-सा क्षेत्ररक्षण कर टीम इंडिया ने साल-दर-साल मेहनत की है। यह बात कप्तान रोहित शर्मा ने कही है। इस बार दक्षिण अफ्रीका को 7 रनों से हरा कर विश्व विजयी तिरंगा लहराया है, तो टीम इंडिया पराजय के जबड़े से ‘अतुलनीय जीत’ छीन कर लाई है। बेशक यह संकरी और रोमांचक जीत रही है। सबसे अद्भुत उपलब्धि तो यह है कि भारत के क्रिकेटर पूरे विश्व कप में ‘अजेय’ रहकर विश्व विजेता बने हैं। यह रोहित शर्मा के 257 रनों, सूर्यकुमार यादव के 199 विस्फोटक रनों, फाइनल मैच में मास्टर विराट कोहली के 59 गेंदों पर 76 रन और अक्षर पटेल की 31 गेंदों पर 47 रनों की छक्केदार पारी के साथ-साथ बुमराह की 15, अर्शदीप सिंह की 17, हार्दिक पंड्या की 11 और कुलदीप यादव की 10 विकेटों की सामूहिक जीत है।

बेशक ऋषभ पंत के योगदान को भी भुलाया नहीं जा सकता। टीम इंडिया का गठन ऐसा है कि बोर्ड और चयनकर्ताओं ने भी हस्तक्षेप नहीं किया। टीम को शिद्दत से खेलने दिया गया। 2023 में एकदिनी क्रिकेट के विश्व कप का फाइनल हारने के बावजूद रोहित शर्मा की कप्तानी पर भरोसा किया गया। बहरहाल टीम इंडिया ऐसी इकलौती टीम है, जिसने एकदिनी विश्व कप, टी-20 विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी 2-2 बार जीते हैं। नतीजतन टीम इंडिया टी-20 की भी विश्व में ‘नंबर वन’ टीम है। एक दौर था, जब हम ऐसी ‘सर्वोच्चता’ की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। आज से 13 साल पहले 2011 में टीम इंडिया ने दूसरी बार एकदिनी क्रिकेट का विश्व खिताब जीता था। अब भारत में कपिलदेव, महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा सरीखे विश्व विजेता कप्तान हैं। अब नई, युवा पीढ़ी इस करिश्माई उपलब्धि का सिलसिला बरकरार रखेगी। चूंकि विश्व विजयी होने के तुरंत बाद विराट कोहली ने ‘अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट’ से संन्यास की घोषणा कर दी है और 2026 के अगले टी-20 विश्व कप तक रोहित शर्मा की उम्र भी 39 साल हो जाएगी, लिहाजा नए नेतृत्व को ढूंढने और तराशने की अहम दरकार है। भारत की बल्लेबाजी विख्यात रही है। विराट नहीं चले, तो रोहित के छक्कों ने धुएं उड़ा दिए। अब गेंदबाजी का खौफ भी फैलने लगा है। बुमराह की स्विंग का तोड़ विरोधी टीमें नहीं निकाल पा रही हैं। अर्शदीप ऐसा गेंदबाज उभरा है, जिसकी सटीक गति ने विरोधी पक्ष के पसीने छुड़ा रखे हैं। कुलदीप और अक्षर की घूमती गेंदें एक रहस्य लगती हैं। इसी विश्व कप के दौरान टीम इंडिया ने गत चैंपियन इंग्लैंड और ऑस्टे्रलिया की टीमों को पटखनी दी है, उसे समूचे विश्व के क्रिकेट प्रेमियों ने देखा होगा और सराहा भी होगा। विश्व चैंपियन बनने की ‘गुरु दक्षिणा’ मुख्य कोच राहुल द्रविड़ को दी गई है, क्योंकि इसी प्रतियोगिता के साथ उनका दौर भी समाप्त हो गया है। संभवत: गौतम गंभीर अब टीम इंडिया के नए कोच होंगे। कोहली को विदाई की सौगात भी मिली है और वह ‘प्लेयर ऑफ दि मैच’ भी चुने गए हैं। ‘प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट’ का सम्मान बुमराह को दिया गया है। अब भारत लौटने पर टीम का ‘नायकीय स्वागत’ किया जाएगा। देश की अपेक्षा और उम्मीद रहेगी कि टीम अंतिम दौर में तनाव और दबाव के कारण फिसलना कम करे। इसका भी प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। खिलाड़ी अपने खेल में निरंतरता कायम रखने की कोशिश करें। बहरहाल सभी को ढेरों बधाइयां।

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