सस्ता डाटा पड़ रहा है महंगा

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने हाल ही में टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे वॉयस कॉल और एसएमएस के साथ डाटा को अनिवार्य रूप से बंडल करना बंद करें। उदाहरण के लिए कंपनियों से कहा गया है कि वे ऐसे प्लान भी दें जिनमें सिर्फ वॉयस और एसएमएस की सुविधा हो और डाटा शामिल न हो। इस कदम से उन ग्राहकों का खर्च कम होगा जिन्हें डाटा की जरूरत नहीं होती और जो अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल सिर्फ कॉल करने या एसएमएस भेजने के लिए करते हैं। हालांकि, सस्ते डाटा के गलत इस्तेमाल की समस्या को कम करने के लिए ट्राई एक और कदम उठा सकता है। वे टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दे सकते हैं कि वे हर दिन 1 या 2 जीबी डाटा देने के बजाय, महीने में 2 से 5 जीबी तक सीमित डाटा दें, ताकि डाटा का इस्तेमाल किया जा सके। यही नहीं माता पिता जिन्होंने अपनी बच्चों को स्मार्टफोन इसलिए दिलाए हैं ताकि वे अपनी शिक्षा की आवश्यकता को पूर्ण कर सकें, उनके लिए भी सीमित डाटा के प्लान ज्यादा उपयोगी हो सकते हैं। ऐसे में बच्चे डाटा का मितव्ययता से उपयोग करना सीखेंगे…
भारत दुनिया में सबसे सस्ता डाटा उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल है। भारत में प्रति जीबी डाटा की कीमत मात्र 5 से 6 रुपए ही है। 2014 में यह कीमत 269 रुपए से 308 रुपए प्रति जीबी थी। यानी पिछले 12 वर्षों में डाटा की कीमत 97 प्रतिशत घटी है। यदि वाई-फाई डाटा की बात करें तो कई सार्वजनिक स्थान में तो यह मुफ्त उपलब्ध होता है। निजी तौर पर भी यह घरों और व्यावसायिक स्थलों पर विभिन्न कंपनियों द्वारा साल भर में मात्र 5000 से 10000 रुपए प्रति वर्ष की कीमत पर लगभग असीमित डाटा मिलता है। डाटा की गति के अनुसार कीमत तय होती है। गौरतलब है कि अभी तक देश में 7.22 लाख किलोमीटर अपटिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है। भारत में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटरनेट दुनिया में दूसरे स्थान पर है। इस विस्तार के कारण भारत में स्मार्टफोन की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसके कारण भारत में डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन कॉमर्स, डिजिटल पेमेंट और इंटरनेट आधारित प्लेटफार्म का चलन बढ़ा है। भारत में ब्रॉडबैंड 100 करोड़ तक पहुंच चुका है। अन्य देशों से तुलना करें तो भारत में डाटा अमेरिका, यूरोपीय देशों और जापान ही नहीं चीन से भी कहीं सस्ता है। जहां अमेरिका में यह 3.5 गुना ज्यादा 0.20 डॉलर प्रति जीबी है, चीन में यह आधा डॉलर यानी 47 रुपए प्रति जीबी है। दुनिया के अधिकांश देशों में मोबाइल डाटा की कीमत भारत से अधिक है। गौरतलब है कि सामथ्र्य के हिसाब से तो भारत में यह और भी अधिक अफॉर्डेबल है।
जहां भारत की प्रति व्यक्ति आय दुनिया में 146वें स्थान पर आती है, मोबाइल डाटा की कीमत में किफायत में भारत का स्थान सबसे ऊपर के देशों में होना यह बताता है कि भारत में डाटा बहुत ही अफॉर्डेबल है। कितना उपयोग होता है डाटा : टेलीकॉम निर्माता नोकिया कंपनी के अनुसार भारत में प्रति व्यक्ति वार्षिक डेटा उपयोग 2025 में 31 जीबी तक पहुंच गया है, जो 2024 में 27.5 जीबी ही था। डाटा का उपयोग पिछले 5 वर्षों में 21.7 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ा है। केवल डाटा ही नहीं डाटा की स्पीड में भी खासा विकास हुआ है। आज भारत में 5जी पैंठ 25 प्रतिशत से अधिक है और मेट्रो शहरों में तो यह 58 प्रतिशत से अधिक है। कहां उपयोग होता है डाटा : महत्वपूर्ण बात यह है कि डाटा का प्रयोग कहां और कितना होता है? भारत में 2025 में 50 करोड़ सोशल मीडिया उपयोग करने वाले मोबाइल ग्राहक थे। न्यूज एजेंसी रॉयटर का कहना है कि भारत में प्रतिदिन औसतन भारतीय 3.2 घंटे सिर्फ सोशल मीडिया एप्स पर ही खर्च करता है। संदेश भेजने या प्राप्त करने पर 1 घंटा 6 मिनट प्रतिदिन इस्तेमाल होते हैं, जो व्यैक्तिक और व्यवसाय संबंधी दोनों हो सकते हैं। बिजनेस और उपयोगिता के लिए मात्र 42 मिनट ही इस्तेमाल होते हैं और अन्य पर 35 मिनट। यानी कहा जा सकता है कि उत्पादकता की दृष्टि से मात्र 42 मिनट और लगभग 90 मिनट मिश्रित कार्य निष्पादन जैसे संचार, शिक्षा, नैविगेशन, बैंकिंग, शोपिंग आदि के लिए इस्तेमाल होता है। यानि कहा जा सकता है कि कुल 5 घंटे 45 मिनट का समय औसतन मोबाइल पर खर्च होता है जिसमें से लगभग 60 प्रतिशत तो सिर्फ सोशल मीडिया और शेष 40 प्रतिशत अन्य कार्यों पर खर्च होता है। समझा जा सकता है कि कितनी बड़ी मात्रा में भारत के लोगों, जिनमें से अधिकांश युवा हैं, का समय अनुत्पादक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होता है। ईवाई के अनुसार वर्ष 2025 में भारतीयों ने 123 करोड़ घंटे स्मार्ट फोन पर इस्तेमाल किए, जो 5.8 घंटे प्रति दिन माना जा सकता है और इनमें 60 प्रतिशत तो सिर्फ सोशल मीडिया एप्स पर ही खर्च हुए। पिछले 12 सालों में जैसे-जैसे डाटा सस्ता हुआ है, उससे भारत में डाटा का उपयोग पहले से ज्यादा बढ़ गया है। मोबाइल कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ऐसे प्लान लेकर आती हैं, जिससे डाटा का उपयोग और ज्यादा बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, हम देखते हैं कि पूर्व में जहां कॉलिंग के साथ डाटा सीमित रूप से, 1 जीबी या 2 जीबी प्रति माह मिलता था, लोग डाटा का किफायती इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब प्रतिदिन 1 जीबी या 2 जीबी डाटा के प्लान उपलब्ध हैं, जिसके कारण डाटा का ज्यादा उपयोग होता है। यहां समझना होगा कि डाटा का उपयोग बढऩे के साथ ही साथ समय की खपत भी बढ़ती है। हाल ही में ग्राहकों को राहत देने की दृष्टि से मोबाइल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है कि जिसको जितनी आवश्यकता हो, उसी प्रकार का प्लान उसको उपलब्ध कराया जाए।
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने हाल ही में टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे वॉयस कॉल और एसएमएस के साथ डाटा को अनिवार्य रूप से बंडल करना बंद करें। उदाहरण के लिए कंपनियों से कहा गया है कि वे ऐसे प्लान भी दें जिनमें सिर्फ वॉयस और एसएमएस की सुविधा हो और डाटा शामिल न हो। इस कदम से उन ग्राहकों का खर्च कम होगा जिन्हें डाटा की जरूरत नहीं होती और जो अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल सिर्फ कॉल करने या एसएमएस भेजने के लिए करते हैं। हालांकि, सस्ते डाटा के गलत इस्तेमाल की समस्या को कम करने के लिए ट्राई एक और कदम उठा सकता है। वे टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दे सकते हैं कि वे हर दिन 1 या 2 जीबी डाटा देने के बजाय, महीने में 2 से 5 जीबी तक सीमित डाटा दें, ताकि डाटा का इस्तेमाल किया जा सके। यही नहीं माता पिता जिन्होंने अपनी बच्चों को स्मार्टफोन इसलिए दिलाए हैं ताकि वे अपनी शिक्षा की आवश्यकता को पूर्ण कर सकें, उनके लिए भी सीमित डाटा के प्लान ज्यादा उपयोगी हो सकते हैं। ऐसे में बच्चे डाटा का मितव्यता से उपयोग करना सीखेंगे और समय का दुरुपयोग भी नहीं होगा और बच्चे मोबाइल से ध्यान हटा कर खेलने और दूसरी रचनात्मक गतिविधियों में ध्यान लगाएंगे। दुविधा यह है कि आजकल के बच्चे मोबाइल पर ज्यादा बिजी होते हैं। हर कोई मोबाइल से चिपका रहता है। बच्चों की अपने माता-पिता से बातचीत भी सीमित होती है। इससे बच्चे एक अलग दुनिया में रहने लगे हैं, जहां वह परिवारों से कटे रहते हैं।-डा. अश्वनी महाजन



