सजन रे झूठ मत बोलो: जेन-जी से चुनाव आयोग तक दावों और धारणाओं का खेल

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव यानी ‘डूसू’ हम जीते। ‘जेन-जी’ हमारे साथ..! ‘डूसू’ हम हारे, लेकिन जरा से अंतर से हारे। इस तरह ‘जेन-जी’ हमारे भी साथ..! हर बंदा ‘जेन-जी’ का भजन करने में लगा है, जैसे ‘जेन-जी’ ही उसका उद्धार करेगी। सर जी! ‘जेन-जी’ को इतना सिर न चढ़ाओ कि कल को उतार भी न सको। एक बार फिर पूर्व उपराष्ट्रपति ने एक विवाद खड़ा किया। उन्होंने नेहरू का हवाला देते हुए कहा कि दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता ज्यादा खतरनाक है..! प्रतिक्रिया में सत्ता प्रवक्ता पूर्व उपराष्ट्रपति के ऐसे ही कुछ बयानों की लाइन लगाकर उनको ‘हिंदू विरोधी’ सिद्ध करने लग जाते हैं और ‘ध्रुवीकरण’ होने लगता है।
बहरहाल, मीडिया में आइआइटी मुंबई के छात्र साहिल की कहानी जारी रहती है। बहुत से छात्र साहिल को न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन कर एक प्रोफेसर को हटाने की मांग करने लगते हैं। साहिल के माता-पिता भी आरोप लगाते हैं कि उसे पहले से परेशान किया जा रहा था, लेकिन आइआइटी मुंबई के अलावा अन्य कई प्राध्यापक भी यह कहते हुए प्रोफेसर के पक्ष में आते हैं कि उसने तो अपनी ड्यूटी की। फिर एक दिन कुछ चैनल उस ‘सीसीटीवी फुटेज’ को दिखाने लगते हैं, जिसमें परीक्षा देता साहिल कथित रूप से अपना मोबाइल देखता हुआ दिखता है। निरीक्षक उसे पकड़ते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं करते। जवाब में साहिल के पक्षधर कहते हैं कि वह मोबाइल नहीं था, ‘कैलकुलेटर’ था। सच क्या है, जांच के बाद ही मालूम होगा। कई चर्चकों ने ‘अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम’ पर ‘एक तरफ झुका’ होने का आरोप लगाया। कुछ का मत रहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों पर आज भी अत्याचार होते हैं, इसीलिए कानून बना है। इसकी आलोचना गलत है।
इसी बीच, एक अंग्रेजी अखबार (द इंडियन एक्सप्रेस) में छपी चुनाव आयोग संबंधी रिपोर्ट ने चैनलों की बहसों में आग लगा दी। रिपोर्ट कहती रही कि तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने दस महीने में चौदह बार मुख्य चुनाव आयुक्त के कई प्रस्तावों पर आपत्ति की, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ने इसे लागू किया। विपक्ष के एक बड़े वकील साहब ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्त बराबर का अधिकार रखते हैं, तो भी फैसले सर्वसम्मति से ही होते हैं, लेकिन मुख्य आयुक्त ने इस मामले में भी मनमानी की।
विपक्ष के नेता ने इसे पकड़ा और मीडिया को बताया कि वे तो पहले से ही कह रहे हैं कि वोट चोरी हुई है। अब सिद्ध हुआ कि मुख्य चुनाव आयुक्त सरकार से मिले हुए हैं। चुनाव आयोग अब स्वतंत्र संस्था नहीं है। पिछले कई चुनाव सत्ता के पक्ष में चोरी किए गए हैं। कई विपक्षी नेता भी बोले कि इस सबके लिए ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ जिम्मेदार हैं। वे इस्तीफा दें। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री भी जिम्मेदारी लें।
जवाब में चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि आयोग के सदस्यों में मतभेद होते हैं, हो सकते हैं, लेकिन फैसले ‘सर्वसम्मति’ से होते हैं। आलोचक पूछते रहे कि जब सब सर्वसम्मति से फैसले हुए, तब दो सदस्यों ने चौदह बार असहमति क्यों जताई और कैबिनेट सचिव तक को भेजी। सत्ता प्रवक्ताओं ने चुनाव आयोग का बचाव किया कि फैसले बहुमत से हुए हैं। जवाब में विपक्ष के बड़े नेता ने मीडिया को बताया कि हर सरकार को एक वक्त के बाद ‘सत्ता विरोधी लहर’ झेलनी पड़ती है, लेकिन भाजपा की सरकारों के लिए कभी कोई ‘सत्ता विरोधी लहर’ नहीं होती। मुख्य चुनाव आयुक्त सरकार के खिलाफ ‘कोई लहर’ को बनने ही नहीं देते। इसलिए ये गुजरात में तीस साल से जीतते आ रहे हैं और कई राज्यों में भी यही हाल है।
फिर सबसे बड़े विपक्षी दल ने एलान किया कि वह देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग करने जा रहा है। जब तक वे नहीं हटते निष्पक्ष चुनाव असंभव है। शुक्रवार से ही कई राज्यों में विपक्षी कार्यकर्ताओं ने ‘पुतला फूंक’ प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला सुप्रीम कोर्ट में भी जा चुका है। अफसोस कि मुख्य चुनाव आयुक्त आरोपों का सीधा खंडन करने आगे नहीं आए। एक स्पष्टीकरण भेज दिया। इससे विपक्ष के नेता के आरोप और भी यकीन करने योग्य बन जाते हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की बनाई ‘धारणा’ जम के चल रही है। जबकि सत्ता प्रवक्ताओं की ‘धारणा’ भोथरी दिखती है, क्योंकि वे ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ की ‘छाया’ बनकर बोलते हैं, जिनके जवाब ‘हजम’ नहीं होते। ऐसे मामलों में ‘सच’ बड़ा त्रासद होता है। ऐसे में हम दोनों पक्षों से यही कहेंगे कि ‘सजन रे झूठ मत बोलो..!’
पहले जमुई, फिर दिल्ली, फिर समस्तीपुर, फिर बांका। सर्वत्र लड़कियां अपने दोस्त के साथ निकलती हैं। कुछ गुंडे उनसे छेड़छाड़ करते हैं, तो कहीं दोस्त को भगाते हैं और लड़की से बलात्कार करते हैं, वीडियो बनाते हैं, प्रचारित करते हैं और पुलिस देखती रह जाती है। वह तो गनीमत है कि मीडिया ने इनको लेकर सरकारों पर दबाव बनाया है, तब जाकर पुलिस सख्ती पर आई है और कुछ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है।
-सुधीश पचौरी



