छत्तीसगढ़

शिक्षकों के ट्रांसफर का आदेश निकला फर्जी, शिक्षा विभाग के लेटरहेड और हस्ताक्षर का हुआ दुरुपयोग, अब डीपीआई ने इन जिलों के डीईओ से मांगी जानकारी…..

रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में 19 शासकीय कर्मचारियों के स्थानांतरण से जुड़ा एक फर्जी आदेश सामने आया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने 6 अगस्त 2026 को जारी बताए जा रहे इस आदेश को फर्जी करार दिया है। मामले में अब प्रदेश के 15 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।

लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से 14 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में इस मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारियों को जरूरी जानकारी और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी आदेश से जुड़े मामले में संबंधित शासकीय सेवकों की भूमिका की जानकारी जुटाई जाएगी और नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी लेटरहेड और अवर सचिव के हस्ताक्षर का इस्तेमाल

विभाग के मुताबिक, फर्जी स्थानांतरण आदेश तैयार करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के आधिकारिक लेटरहेड का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही अवर सचिव आर.पी. वर्मा के नाम, पदमुद्रा और हस्ताक्षर का भी कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।

यह आदेश क्रमांक ESTB-102/755/2026/20-3 के साथ 6 अगस्त 2026 की तारीख का बताया गया था। इसके जरिए 19 शिक्षक और व्याख्याताओं का स्थानांतरण दर्शाया गया था। लोक शिक्षण संचालनालय ने जांच के लिए इस आदेश को फर्जी बताया है।

देखें फर्जी आदेश की कॉपी

15 जिलों के DEO से मांगी गई जानकारी

मामले की पड़ताल के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने बलौदाबाजार-भाटापारा, दुर्ग, बेमेतरा, बस्तर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, रायपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, राजनांदगांव, उत्तर बस्तर कांकेर, बालोद, कबीरधाम, धमतरी, सरगुजा और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया है।

नक्शे देखें

लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से जारी पत्र

सभी संबंधित अधिकारियों को तीन दिन के भीतर बिंदुवार जानकारी और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है। विभाग यह पता लगाना चाहता है कि फर्जी आदेश किन माध्यमों से जिला कार्यालयों तक पहुंचा और अलग-अलग स्तर पर उस पर किस तरह कार्रवाई हुई।

आदेश के आधार पर कितने कर्मचारियों ने लिया कार्यभार?
जिला शिक्षा अधिकारियों से सबसे अहम जानकारी उन कर्मचारियों को लेकर मांगी गई है, जिन्होंने कथित फर्जी आदेश के आधार पर स्थानांतरण का लाभ लेने की कोशिश की। अधिकारियों को बताना होगा कि कितने कर्मचारियों ने कार्यमुक्ति या नई जगह पर कार्यभार ग्रहण करने के लिए आवेदन दिया था।

इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि कितने कर्मचारियों को वास्तव में कार्यमुक्त किया गया और कितनों को नई जगह पर कार्यभार ग्रहण कराया गया। संचालनालय ने इस संबंध में संबंधित कर्मचारियों की सूची और दस्तावेज भी मांगे हैं, ताकि पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सके।

फर्जी आदेश सामने आने के बाद क्या कार्रवाई हुई?
विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों से यह भी पूछा है कि आदेश के फर्जी होने की जानकारी मिलने के बाद उनके स्तर पर क्या कदम उठाए गए। तीन दिन में मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और मामले में हुई कार्रवाई का विवरण शासन को भेजा जाएगा।

इस मामले में अब जिला स्तर से मिलने वाली रिपोर्ट अहम होगी। इससे पता चलेगा कि फर्जी आदेश किन कार्यालयों तक पहुंचा, उसके आधार पर कितने कर्मचारियों की कार्यमुक्ति या कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया हुई और संबंधित अधिकारियों ने समय रहते क्या कदम उठाए।

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